नवाचार, कौशल और नैतिक मूल्यों को आत्मसात करें : राज्यपाल
मुंबई, 12 अगस्त (हि.स.)। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने बुधवार को पुणे में कहा कि ज्ञान, कौशल, नवाचार, आलोचनात्मक चिंतन और नैतिक मूल्यों को आत्मसात कर युवा स्वयं को भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना चाहिए। राज्यपाल ने यह भी कहा कि आज की जटिल वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए विद्यार्थियों को पारंपरिक शैक्षणिक विषयों की सीमाओं से आगे बढक़र बहुविषयक शिक्षा अपनानी होगी।
राज्यपाल जिष्णुदेव आज लोणी कालभोर स्थित एमआईटी आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी (एमआईटी एडीटी) में आयोजित ‘11वें विद्यारंभ-26’ समारोह में वे विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल तकनीक के कारण विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। तकनीक के साथ नैतिकता, मानवीय मूल्य और करुणा का अभाव होने पर यही तकनीकें विनाशकारी साबित हो सकती हैं। विज्ञान और तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि मानव विनाश के लिए। इसलिए तकनीक के साथ मानवता और करुणा को बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को उद्योग जगत के साथ साझेदारी, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, इनक्यूबेशन केंद्रों और स्टार्टअप इकोसिस्टम को और मजबूत करना चाहिए। विश्वविद्यालयों, विशेष रूप से कृषि विश्वविद्यालयों में बड़े पैमाने पर शोध हो रहा है। शोध से प्राप्त विचारों को व्यावहारिक और समाजोपयोगी समाधानों में बदलने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से समावेशी और सतत विकास में योगदान देने के लिए कुछ गांवों को गोद लेकर उनके विकास तथा विभिन्न समाजोपयोगी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर माईर्स एमआईटी समूह संस्थाओं के संस्थापक अध्यक्ष एवं एमआईटी एडीटी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. विश्वनाथ दा. कराड, महाराष्ट्र के पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जे. डी. लक्ष्मीनारायण, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

