शहरों के समग्र विकास के लिए ब्रिक्स देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए : राज्यपाल
मुंबई, 11 अगस्त, (हि.स.)। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने मंगलवार को कहा कि 21वीं सदी में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ केवल भारतीय विचार नहीं, बल्कि वैश्विक वास्तविकता बन चुका है। भारत ने हमेशा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का हाथ बढ़ाते हुए ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे में ब्रिक्स देशों को अपने शहरों को बेहतर, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार बनाने के उद्देश्य से आपसी सहयोग को और मजबूत करना चाहिए।
राज्यपाल वर्मा ने मंगलवार को मुंबई में आयोजित ‘ब्रिक्स फ्रेंडशिप सिटीज़ कॉन्क्लेव 2026’ का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन का आयोजन ‘मुंबई फर्स्ट’ संस्था की ओर से किया गया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, राज्यपाल के संयुक्त सचिव एस. राममूर्ति, ‘मुंबई फर्स्ट’ के अध्यक्ष नरिंदर नायर, उपाध्यक्ष अशांक देसाई सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
राज्यपाल ने कहा कि शहर नवाचार और रचनात्मकता के इंजन हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में शहरों को नागरिकों के लिए अधिक रहने योग्य और सुविधाजनक बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। इस दिशा में ब्रिक्स देशों के बीच विभिन्न स्तरों पर सहयोग बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां भले ही अलग-अलग हों, लेकिन उनके नागरिकों की आकांक्षाएं काफी हद तक समान हैं। इसलिए इन देशों को एक-दूसरे के अनुभव, विशेषज्ञता और तकनीक से सीखते हुए शहरी विकास की साझा रणनीतियां विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच युवा आबादी, तेजी से बढ़ते शहर, बदलती अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक परिवहन, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल गवर्नेंस और किफायती आवास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अनुभव एवं तकनीक साझा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आपसी सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से ब्रिक्स देश ऐसे शहरों का निर्माण कर सकते हैं, जो न केवल आर्थिक विकास के केंद्र हों, बल्कि समावेशी, टिकाऊ और नागरिकों के लिए बेहतर जीवन प्रदान करने वाले शहर भी बनें।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

