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पुस्तक लेखन व्यक्ति के विचारों को नई उड़ान देता है: राज्यपाल

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मुंबई, 03 अगस्त, (हि.स.)। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने सोमवार को कहा कि पुस्तक लेखन व्यक्ति के विचारों को नई उड़ान देता है और मानवता की सामूहिक ज्ञान-संपदा को समृद्ध बनाता है। उन्होंने कहा कि एक पुस्तक कभी नहीं मरती, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों को प्रेरित करती रहती है। इसलिए पारंपरिक मुद्रित पुस्तकों के पठन का आनंद कभी समाप्त नहीं होना चाहिए।

मुंबई स्थित लोक भवन में आर्यन हाई स्कूल के पूर्व प्राचार्य एवं लेखक नीलकंठ नामजोशी ने आज राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें अपनी तीन पुस्तकों का सेट भेंट किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने लेखक की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक लेखक अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को सार्थक योगदान देता है। उन्होंने महाराष्ट्र को संतों, समाज सुधारकों और वीरों की भूमि बताते हुए कहा कि इस प्रदेश ने देश को छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति संभाजी महाराज, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और गोपाल कृष्ण गोखले जैसी महान विभूतियाँ दी हैं।

राज्यपाल ने कहा कि महाराष्ट्र की साहित्यिक परंपरा भी अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। उन्होंने कहा कि आज भले ही ई-पुस्तकों और डिजिटल तकनीक का युग हो, लेकिन मुद्रित पुस्तकों का महत्व और प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। पुस्तक पढऩा केवल जानकारी प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक गहन, आत्मीय और समृद्ध अनुभव है।

नीलकंठ नामजोशी ने राज्यपाल को अपने लघुकथा संग्रह ‘मोगरा फुलला दारी’, विभिन्न प्रतिष्ठित हस्तियों के साथ हुए पत्राचार का संकलन ‘स्मृतिगंधा’ तथा एक आदिवासी बालिका की उपलब्धियों और उसकी माँ के त्याग पर आधारित उपन्यास ‘भीमा’ भेंट किया। कार्यक्रम में नामजोशी के परिवार के सदस्य और अधिकारी उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव