आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान से जोडक़र वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने की जरूरत: राज्यपाल
मुंबई, 29 सितंबर (हि.स.)। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मंगलवार को कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन और समृद्ध ज्ञान परंपरा है। इसे आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, क्लिनिकल परीक्षण और नवाचार से जोडक़र वैश्विक स्तर पर प्रभावी स्थान दिलाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल वर्मा मंगलवार को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर विश्व आयुर्वेद परिषद, महाराष्ट्र की ओर से दादर स्थित सूर्यवंशी सभागृह में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का व्यापक ज्ञान-स्रोत है। मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम और प्रबंधन में आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा को एक-दूसरे का पूरक बनकर कार्य करना चाहिए।
राज्यपाल ने आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विश्वस्तरीय संस्थानों, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और अनुसंधान सुविधाओं की स्थापना पर जोर दिया। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की तर्ज पर आयुर्वेद विज्ञान एवं अनुसंधान के लिए विश्वस्तरीय संस्थान स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने विश्व आयुर्वेद परिषद से महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के साथ मिलकर आयुर्वेद शिक्षा को मजबूत करने और पाठ्यक्रमों को समयानुकूल बनाने में सहयोग करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाईक, आयुर्वेद उद्यमी रणजीत पुराणिक, पूर्व मुंबई महापौर डॉ. शुभा राऊल सहित वैद्य, शोधकर्ता और विद्यार्थी उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

