संत रविदास और अण्णा भाऊ साठे पर आधारित पांच पुस्तकों का विमोचन
मुंबई, 05 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने सोमवार को लोकभवन में संत रविदास और साहित्यसम्राट अण्णा भाऊ साठे के जीवन एवं साहित्य पर आधारित पांच पुस्तकों का विमोचन किया। समारोह चुनिंदा आमंत्रितों की उपस्थिति में आयोजित किया गया।
राज्यपाल ने आज तहसीलदार स्नेहलता स्वामी (बिंदू) द्वारा लिखित ‘संत रविदास म्हणे’ पुस्तक का विमोचन किया। इसके अलावा मातंग साहित्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. धनाजी उर्फ धनंजय सोमनाथ भिसे द्वारा संपादित ‘अण्णा भाऊ साठे : साहित्यविचार, संशोधन और चिंतन’, ‘अण्णाभाऊ साठे : आकलन और आस्वाद’ तथा हिंदी पुस्तक ‘अण्णा भाऊ साठे : अवधारणा और जागरण’ का भी प्रकाशन किया गया। डॉ. बळीराम गायकवाड़, डॉ. माणिक सोनावणे और डॉ. धनाजी उर्फ धनंजय सोमनाथ भिसे द्वारा संपादित अंग्रेजी पुस्तक ‘अण्णाभाऊ साठे : अ ट्रांसनैशनल लिटरेरी लेगेसी’ का भी विमोचन हुआ।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि लेखन समाज में परिवर्तन लाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। महान व्यक्तित्वों के जीवन और कार्य पर लिखने से उनके विचारों और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलती है। साहित्य का अंतिम उद्देश्य समाज में एकता और सद्भाव को बढ़ावा देना तथा जीवन को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि भारत की संत परंपरा समानता के संदेश का महत्वपूर्ण सामाजिक आंदोलन रही है, लेकिन इसके योगदान का इतिहास में पर्याप्त दस्तावेजीकरण नहीं हुआ। संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, चैतन्य महाप्रभु सहित अनेक संतों ने समाज में समानता और समरसता का संदेश दिया। राज्यपाल ने कहा कि साहित्य विभिन्न भाषाओं और पीढिय़ों को जोड़ता है। कालिदास, मुंशी प्रेमचंद और शेक्सपियर की रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं, क्योंकि अच्छा साहित्य मन और हृदय दोनों को प्रभावित करता है।
उन्होंने लोगों से फूलों के बजाय पुस्तकें भेंट करने का आह्वान किया। कहा कि फूल मुरझा जाते हैं, लेकिन पुस्तक लंबे समय तक लोगों के विचारों को प्रभावित करती है। उन्होंने लेखकों को प्रोत्साहित करने और समृद्ध साहित्यिक विरासत को संरक्षित कर भावी पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
समारोह में पद्मश्री रमेश पतंगे, पद्मश्री गिरीश प्रभुणे, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवींद्र कुलकर्णी, विष्णु वझे, आर्टी के प्रबंध निदेशक सुनील वारे सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

