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बांस को प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है : जिष्णु देव वर्मा

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मुंबई, 27 सितंबर (हि.स.)। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने रविवार को मुंबई में कहा कि बांस प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होने के साथ रोजगार पैदा करने और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा सकता है। इसलिए बांस के उत्पादन के साथ-साथ इससे विभिन्न वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट तैयार करने पर भी जोर दिया जाना चाहिए।

राज्यपाल वर्मा ने आज पवई स्थित होटल द वेस्टिन में बैम्बू इकॉनमी एंड सस्टेनेबिलिटी कॉन्फ्रेंस 2026 कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में 13 राज्यों के बांस किसान, उद्यमी और प्रतिनिधि शामिल हुए।

राज्यपाल ने कहा कि बांस भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। बांस से गहने, कप, सजावटी वस्तुओं और घरेलू उपयोग के कई तरह के उत्पाद बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रिसर्च, आधुनिक तकनीक और कमर्शियलाइजेशन के जरिए बांस को आम लोगों के लिए सस्ता, टिकाऊ और आसानी से उपलब्ध विकल्प बनाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों से निपटने में बांस, सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों के साथ मिलकर अहम भूमिका निभा सकता है। पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति के बीच संतुलन कायम करने वाला टिकाऊ विकास सामूहिक जिम्मेदारी है।

किसानों के लिए फायदेमंद साइडलाइन बन सकती है बांस की खेती: भरत गोगावाले

रोजगार गारंटी योजना, हॉर्टिकल्चर और मार्शलैंड डेवलपमेंट मंत्री भरत गोगावाले ने कहा कि बांस की खेती को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए जागरूकता फैलाने के साथ-साथ बांस आधारित उद्योगों को भी प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार बांस की खेती के लिए किसानों को आर्थिक सहायता दे रही है। खेती के बाद तीन वर्षों तक इसके रखरखाव के लिए भी सहायता प्रदान की जाती है। बांस से विभिन्न उत्पाद और उद्योग विकसित करने की बड़ी संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से जरूरी मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पारंपरिक खेती के साथ बांस की खेती किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त और लाभदायक स्रोत बन सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव