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समय पर ताजा और पौष्टिक भोजन के लिए स्थानीय स्तर पर फैसले लें : फडणवीस

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मुंबई, 05 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को मुंबई में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को समय पर ताजा, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलना चाहिए। इसके लिए स्कूल शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग संयुक्त रूप से नीति तैयार कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें।

सह्याद्री अतिथि गृह में सोमवार को प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना की समीक्षा बैठक मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई। बैठक में फडणवीस ने कहा कि वर्तमान में कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों को योजना का लाभ मिलता है। अब इसे कक्षा 10 तक बढ़ाने की संभावना की जांच कर प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी क्षेत्रों में भी जहां संभव हो, केंद्रीय रसोई (सेंट्रल किचन) की व्यवस्था अपनाई जाए। हालांकि, दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में केंद्रीय रसोई से भोजन पहुंचने में देरी की संभावना को देखते हुए ग्राम पंचायतों के माध्यम से स्थानीय व्यवस्था विकसित की जाए। केंद्रीय रसोई का चयन करते समय यह सुनिश्चित किया जाए कि स्कूलों तक ताजा और पौष्टिक भोजन समय पर पहुंच सके। भोजन वितरण की जिम्मेदारी यथासंभव स्थानीय स्वयं सहायता समूहों को देने के निर्देश भी दिए गए।

फडणवीस ने कहा कि भोजन की गुणवत्ता, सेवा और भुगतान व्यवस्था के लिए स्पष्ट मानदंड तय किए जाएं। जिला कलेक्टर, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और नगर आयुक्त स्थानीय जरूरतों और व्यवहार्यता के आधार पर निर्णय लें। स्कूल शिक्षा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग जिला स्तर पर विद्यार्थियों की जरूरत का आकलन कर उपलब्ध संसाधनों का समन्वित उपयोग करें। मुख्यमंत्री ने दोनों विभागों को संयुक्त नीति तैयार करने से पहले जिला कलेक्टर और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के सुझाव लेने तथा स्थानीय समस्याओं के अनुरूप आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपयोगी सुझावों को नीति में शामिल कर संयुक्त प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने सेंट्रल किचन का दायरा बढ़ाने और ग्राम पंचायतों को निधि उपलब्ध कराकर स्थानीय स्तर पर पौष्टिक भोजन देने की जिम्मेदारी सौंपने का सुझाव दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से चावल की मात्रा कम कर अन्य अनाज की मात्रा बढ़ाने का अनुरोध करने की बात कही। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य कार्ड बनाए जा रहे हैं और अब स्वास्थ्य जांच अभिभावकों की मौजूदगी में की जाएगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि शहरी क्षेत्रों की 30 आंगनवाडिय़ों में विभाग के माध्यम से इस्कॉन को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी जा रही है। इसके परिणामों की समीक्षा के बाद आंगनवाडिय़ों की संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली खाद्य समिति को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पौष्टिक भोजन के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सुझाव दिया कि पौष्टिक भोजन में मैदा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। बैठक में स्कूल शिक्षा आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह, महिला एवं बाल विकास आयुक्त माधवी सरदेशमुख तथा इस्कॉन के प्रतिनिधियों ने अन्नामृत फाउंडेशन की केंद्रीय रसोई व्यवस्था पर प्रस्तुति दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव