गोकुल दूध संघ चुनाव विवाद पर बाेले फडणवीस - दोबारा चुनाव से बचने काे नियुक्त किए चार निदेशक
मुंबई,05 नवंबर (हि.स.)। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ लिमिटेड (गोकुल) के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि गोकुल में दोबारा चुनाव कराने और प्रशासनिक हस्तक्षेप की स्थिति से बचने काे चार निदेशकों की नियुक्ति का निर्णय लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन निदेशकों की नियुक्ति नहीं होती तो गोकुल में दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती थी।
गुरुवार को पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि गोकुल के चुनाव में 13 सीटें जीतने के बावजूद चेयरमैन के चुनाव के लिए आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो पा रहा है। चेयरमैन के चुनाव के लिए कम से कम 14 सदस्यों की मौजूदगी जरूरी है। ऐसे में कानूनी अड़चन पैदा हो गई है। उन्हाेंने बताया कि चेयरमैन के चुनाव के लिए दो-तीन बार बैठक आयोजित की गई, लेकिन कोरम पूरा नहीं होने के कारण चुनाव नहीं हो सका। यदि लगातार बैठकें रद्द होती रहीं तो चुनाव प्रक्रिया रद्द होने और संस्था में प्रशासक नियुक्त होने की स्थिति पैदा हो सकती है। इसी परिस्थिति से बचने के लिए सरकार ने चार विशेषज्ञ निदेशकों की नियुक्ति का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग सरकार के इस फैसले के कानूनी रूप से टिकने पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन सरकार ने एडवोकेट जनरल की राय पर विचार करने के बाद ही यह निर्णय लिया है।
गोकुल चुनाव विवाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हस्तक्षेप पर भी मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी ने इस मामले को वोट चोरी बताते हुए ट्वीट किया था। इस पर फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाले राहुल गांधी को एक छोटे से स्थानीय चुनाव पर ट्वीट करना पड़ रहा है। गोकुल में केवल साढ़े चार हजार मतदाता हैं और यह कोई राष्ट्रीय मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भी इस मामले में उलझ रहे हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस नेता सतेज पाटिल समेत विपक्षी दलों ने सरकार के फैसले की आलोचना की है। विपक्ष का आरोप है कि चार निदेशकों की नियुक्ति के जरिए सरकार गोकुल दूध संघ पर अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रण स्थापित करना चाहती है। सतेज पाटिल ने सरकार के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने 9 नवंबर को कोल्हापुर में आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।
गोकुल दूध संघ में कुल 25 सदस्य हैं। महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम और संघ के उपनियमों के अनुसार चेयरमैन के चुनाव के लिए 14 सदस्यों की जरूरत है। मौजूदा चुनावी स्थिति में सतेज पाटिल समर्थित गुट के पास 13 सदस्य हैं, जबकि महायुति के पास 12 सदस्य बताए जा रहे हैं। हालिया बैठक में केवल 13 सदस्य उपस्थित हुए थे। महायुति के 12 सदस्यों ने मतदान किया, लेकिन आवश्यक कोरम पूरा नहीं होने के कारण बैठक रद्द करनी पड़ी और चेयरमैन का चुनाव नहीं हो सका।
नियमों के अनुसार, यदि लगातार दो या तीन बैठकें कोरम के अभाव में रद्द होती हैं तो संघ में प्रशासक नियुक्त किए जाने की स्थिति बन सकती है। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया दोबारा कराई जा सकती है। इसी कानूनी और राजनीतिक पेच के बीच महाराष्ट्र सरकार के चार निदेशकों की नियुक्ति के फैसले ने गोकुल दूध संघ के चुनाव को लेकर विवाद और बढ़ा दिया है। अब सबकी नजर विपक्ष की कानूनी चुनौती और सरकार के फैसले पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

