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अपनी संस्कृति और पारंपरिक तरीके से मनाएं उत्सव : राज ठाकरे

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अपनी संस्कृति और पारंपरिक तरीके से मनाएं उत्सव : राज ठाकरे


मुंबई, 06 सितंबर (हि.स.)। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को कहा कि हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं के अनुसार ही त्योहार और उत्सव मनाना चाहिए। उन्होंने गणेशोत्सव के दौरान डीजे बजाए जाने का भी जोरदार विरोध किया है और सादगी से यह उत्सव मनाने की अपील की है।

राज ठाकरे आज ठाणे में मनसे के पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि डीजे बैन को लेकर बहस चल रही है। मैंने पहले कभी इस पर स्टैंड नहीं लिया था। आप किस तरह का डॉल्बी इस्तेमाल कर रहे हैं? किस तरह का डीजे है? त्योहार हमारे पारंपरिक तरीके से क्यों नहीं मनाए जाते? उन्होंने गणपति विसर्जन के दौरान डीजे की तेज आवाज और नाच-गाने को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लोग जिस श्रद्धा से गणपति को घर लाते हैं, उसी भावना से विसर्जन भी होना चाहिए।

उन्होंने कहा, इतनी श्रद्धा से गणपति को घर लाते हैं और विसर्जन के समय नाचते हैं। आपको कैसी खुशी होती है? आप इसमें किस तरह की खुशी मनाते हैं? उन्होंने बताया कि उनके घर डेढ़ दिन के गणपति आते हैं। उन्होंने कहा, मैं बच्चों के लिए गणपति लाया था। जब गणपति जाते हैं, तो घर में बहुत दुख होता है। ऐसा लगता है जैसे घर से उत्साह चला गया हो। उस समय बुरा लगता है। तो बुरा लगने के बजाय आप किस तरह का उत्साह मनाते हैं?

राज ठाकरे ने दही हांडी और गणेशोत्सव के बदलते स्वरूप पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या महाराष्ट्र में उत्तर भारत की संस्कृति को अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गोविंदा उत्सव के दौरान महिलाओं को मंच पर लाकर नृत्य कराने जैसी प्रथाएं महाराष्ट्र की पारंपरिक संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने देश को कई चीजें सिखाई हैं और यहां की संस्कृति की अपनी अलग पहचान है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज महाराष्ट्र भी दूसरों की नकल करने लगा है और इसे लेकर उन्होंने चिंता जताई।

मनसे प्रमुख ने डीजे-डॉल्बी की तेज आवाज और लेजर लाइट के इस्तेमाल पर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी जताईं। उन्होंने कहा कि तेज आवाज से लोगों की सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जबकि लेजर लाइट आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को हृदय संबंधी समस्या है, तो अत्यधिक तेज आवाज उसके लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। उन्होंने सवाल किया कि त्योहारों को हम किस दिशा में ले जा रहे हैं। उन्होंने गणेशोत्सव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को याद करते हुए कहा कि लोगों को यह समझना चाहिए कि लोकमान्य तिलक ने सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत किस उद्देश्य से की थी। उन्होंने कहा कि त्योहार की मूल भावना को बनाए रखना जरूरी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव