‘शिक्षा आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है’ : राज्यपाल
मुंबई, 03 सितंबर (हि.स.)। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने मुंबई में कहा कि शिक्षा आजीवन चलने वाली प्रक्रिया है। इसलिए एचएसएनसी विश्वविद्यालय संवेदनशील नागरिक और जिम्मेदार नेतृत्व तैयार करे।
महाराष्ट्र के राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति जिष्णु देव वर्मा एचएसएनसी विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह को मुंबई वर्ली स्थित विश्वविद्यालय सभागार में संबोधित कर रहे थे । समारोह की अध्यक्षता कर रहे राज्यपाल ने स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं तथा 45 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया। यह जानकारी लोकभवन के प्रवक्ता ने गुरुवार को दी।
राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि आजीवन सीखने की यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने कहा, दीक्षांत, शिक्षांत नहीं है। उन्होंने कहा कि देश को डॉक्टर, इंजीनियर और विभिन्न क्षेत्रों के कुशल पेशेवरों की आवश्यकता है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरत अच्छे नागरिकों और जिम्मेदार नेतृत्व की है। उनके अनुसार, जो व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, वही नेता है।
राज्यपाल ने एचएसएनसी विश्वविद्यालय की कम समय में हुई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना करते हुए विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे व्यावसायिक जीवन में प्रवेश करते समय डिग्री के साथ सहानुभूति, करुणा, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को भी अपने साथ लेकर जाएं। उन्होंने कहा कि कक्षा में मिलने वाली शिक्षा के साथ-साथ कक्षा के बाहर के अनुभव भी विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाज के साथ संवाद और सहभागिता से टीम भावना, करुणा और सहानुभूति विकसित होती है, जो आगे चलकर जिम्मेदार नेतृत्व की नींव बनती है। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को अनुसंधान के केंद्र बताते हुए एचएसएनसी विश्वविद्यालय की प्रगति की प्रशंसा की। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के कमजोर, गरीब और वंचित वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर एचएसएनसी बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. निरंजन हिरानंदानी ने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से मुंबई के निकट अलीबाग में विश्वस्तरीय परिसर विकसित किया जा रहा है। विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. हेमलता बागला ने बताया कि वर्ष 2020 में तीन महाविद्यालयों के साथ शुरू हुए विश्वविद्यालय ने अब आठ विश्वविद्यालयीय स्कूल स्थापित किए हैं और पांच अन्य महाविद्यालयों को भी अपने अधीन शामिल किया है। विश्वविद्यालय के प्रोवोस्ट अनिल हरिश ने कहा कि पिछले छह वर्षों में विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 30,000 विद्यार्थी विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

