सभी भारतीय भाषाओं के परस्पर सम्मान का संकल्प लें: फडणवीस
मुंबई, 14 सितंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को नवी मुंबई में हिंदी, मराठी सहित सभी भारतीय भाषाओं के परस्पर सम्मान का संकल्प लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा, मेरी मां मराठी है, लेकिन देश की अन्य सभी भाषाएं मेरी मौसी के समान हैं। मां का गौरव करते हुए मौसी का भी पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नवी मुंबई में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मातृभाषा में शिक्षा से विद्यार्थियों की समझने की क्षमता और शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। भारतीय भाषाओं का ज्ञान बढ़ाकर ही ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को सही अर्थों में साकार किया जा सकता है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च वैश्विक मंच पर हिंदी में दिए गए भाषण का स्मरण करते हुए कहा कि इससे देश का गौरव बढ़ा था। उन्होंने कहा कि विश्व के अनेक विकसित देश अपनी मातृभाषाओं का स्वाभिमान के साथ उपयोग करते हैं। भारत को भी दैनिक जीवन और प्रशासनिक कार्यों में अपनी समृद्ध भारतीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए। फडणवीस ने कहा कि हिंदी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में तीसरे स्थान पर है। इसे व्यापक जनभाषा का स्वरूप देने में मुंशी प्रेमचंद जैसे साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रेमचंद की ‘गोदान’ जैसी कृतियों ने आम आदमी की पीड़ा और संघर्ष को प्रभावी ढंग से सामने रखा। वहीं राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर और दुष्यंत कुमार की लेखनी ने हिंदी साहित्य को वैचारिक ऊंचाई प्रदान की। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिंदी ने देश को जोडऩे वाली महत्वपूर्ण संपर्क भाषा की भूमिका निभाई।
हिंदी सभी भारतीय भाषाओं की सखी- एकनाथ शिंदे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि हिंदी सभी भारतीय भाषाओं की सखी है और महाराष्ट्र में हिंदी दिवस सम्मेलन का आयोजन होना मराठी भाषा के लिए भी सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि मराठी और हिंदी दोनों देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली सगी बहनें हैं। उन्होंने संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और संत नामदेव के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संतों ने पूरे देश को दिशा दी। संत नामदेव की रचनाओं को गुरु ग्रंथ साहिब में भी सम्मानपूर्वक स्थान मिला है। शिंदे ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले की तुलना में केंद्र सरकार के कामकाज में हिंदी का उपयोग उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। अब हिंदी का उपयोग केवल संवाद तक सीमित न रहकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पुलिस, कानून और न्याय व्यवस्था में भी तेजी से बढऩा चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में बसे हिंदी भाषी नागरिकों ने मराठी भाषा का सम्मान करते हुए राज्य के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रशासन की भाषा सरल और सहज हो-सुनेत्रा पवार
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने कहा कि गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर हिंदी दिवस मनाया जाना शुभ संयोग है। गणेशोत्सव समाज की बाधाओं को दूर कर एकता स्थापित करने वाला पर्व है। उन्होंने कहा कि भारत में भाषाएं अनेक हैं, लेकिन भारतीयों की राष्ट्रीय भावना एक है। उन्होंने प्रशासन, शिक्षा और आधुनिक प्रौद्योगिकी में भारतीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मराठी और हिंदी साहित्य के बीच परस्पर अनुवाद की समृद्ध परंपरा रही है। मुंबई और नवी मुंबई जैसे शहरों में विभिन्न भाषाई समुदायों का सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की वास्तविक पहचान है। सुनेत्रा पवार ने कहा कि शासन की भाषा जटिल नहीं, बल्कि ऐसी सरल और सहज होनी चाहिए जिसे आम नागरिक आसानी से समझ सके।
इस अवसर पर वन मंत्री गणेश नाईक, स्थानीय विधायक मंदा म्हात्रे, विभागीय आयुक्त रुबल अग्रवाल, जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल, नवी मुंबई महानगरपालिका आयुक्त कैलास शिंदे और नवी मुंबई पुलिस आयुक्त मिलिंद भारंबे सहित देशभर से आए साहित्यकार, भाषाविद्, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

