महाराष्ट्र विस सत्र : देवेंद्र फडणवीस ने कहा-राज्य में ड्रग्स की समस्या पर 'जीरो टॉलरेंस'
मुंबई, 23 जून (हि.स.)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को मुंबई में ड्रग माफिया के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति की घोषणा की है। उन्होंने विधानसभा को बताया कि राज्य सरकार ने ड्रग सिंडिकेट को खत्म करने के लिए होल-ऑफ-गवर्नमेंट (पूरे सरकारी तंत्र को शामिल करने वाला) दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा सहित 15 विभाग शामिल हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा में आज विपक्ष ने मुंबई, पुणे और विदर्भ क्षेत्र जैसे बड़े शहरी इलाकों में नशीले पदार्थों के कथित प्रसार का मुद्दा जोर शोर से उठाया। इस पर 20 मिनट तक ज़ोरदार चर्चा हुई, जिसमें विपक्षी नेताओं ने अवैध पदार्थों के प्रसार को रोकने के लिए तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की।
इसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने सातारा जिले में हालिया कार्रवाई के बारे में एक महत्वपूर्ण जानकारी दी और पुष्टि की कि एक बड़े अंतर-राज्यीय एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग रैकेट के कथित सरगना सलीम डोला को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हाेंने कहा, सलीम डोला, जिसे रेड कॉर्नर नोटिस के बाद पकड़ा गया था, उसने कबूल किया है कि उसने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में रूष्ठ बनाने वाली फैक्टरियां स्थापित की थीं और लगभग 4,000 किलोग्राम ड्रग का उत्पादन किया था।
कार्रवाई के आधिकारिक आंकड़े देते हुए, मुख्यमंत्री ने बताया कि जनवरी और अप्रैल 2026 के बीच, पुलिस और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 1,142 मामले दर्ज किए, जिसके परिणामस्वरूप 1,626 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 254.53 करोड़ रुपये मूल्य के नशीले पदार्थ ज़ब्त किए गए। इसके अलावा 2025 के दौरान 523.17 करोड़ रुपये मूल्य के प्रतिबंधित पदार्थ नष्ट किए गए।
उन्हाेंने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार किसी भी अधिकारी को नहीं बचाएगी। उन्होंने कहा, ड्रग्स से जुड़े अपराधों में शामिल पाए जाने वाले किसी भी पुलिस अधिकारी को सिर्फ़ सस्पेंड नहीं, बल्कि नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा। अपने इलाके में लगातार ड्रग्स की गतिविधियों के लिए सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य भर में अभी ड्रग के खिलाफ पुलिस की सात यूनिट काम कर रही हैं और हर पुलिस स्टेशन में खास एंटी-नारकोटिक्स सिस्टम बनाने की योजना है। इसके अलावा, सरकार नशीले पदार्थों की लत से प्रभावित लोगों की मदद के लिए हर जिले में 50 बिस्तरों वाले मुफ़्त नशा-मुक्ति और पुनर्वास केंद्र बना रही है। सरकार ने ज़ोर देकर कहा कि वह अपने 'ड्रग-फ्री मुंबई' अभियान के लिए प्रतिबद्ध है और युवाओं को ड्रग्स के खतरे से बचाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों के आस-पास ज़्यादा सतर्कता और जागरूकता अभियान चलाने पर ध्यान दे रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

