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महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, बहादुर पुलिसकर्मियों के लिए शुरू होगा 'मुख्यमंत्री बहादुरी मेडल'

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मुंबई, 06 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र कैबिनेट ने मंगलवार को ड्यूटी के दौरान असाधारण साहस और जोखिम उठाने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए ‘मुख्यमंत्री बहादुरी मेडल’ शुरू करने को मंजूरी दी है। पुरस्कार के तहत 50 हजार रुपये नकद, मेडल और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि पुरस्कार के लिए पुलिसकर्मियों के कार्यों का मूल्यांकन 1 जनवरी से शुरू होने वाले वर्ष के दौरान किया जाएगा। चयन के लिए तीन स्तरीय समिति गठित की जाएगी। पुरस्कार की घोषणा महाराष्ट्र दिवस की पूर्व संध्या पर 1 मई को होगी और मुख्यमंत्री स्वयं पुरस्कार प्रदान करेंगे। मंत्रिमंडल ने वडार समुदाय के पारंपरिक पत्थर तोडऩे और खुदाई के काम के लिए वार्षिक खुदाई सीमा 200 ब्रास से बढ़ाकर 500 ब्रास करने को भी मंजूरी दी। इससे छोटे खनिजों पर लगने वाली रॉयल्टी में राहत मिलेगी। इसके लिए महाराष्ट्र भूमि राजस्व नियम, 1968 में संशोधन किया जाएगा। बैठक में उच्च शिक्षा संस्थानों में नई तकनीक और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए ‘सीएम श्रीष्ठी ’ योजना को भी मंजूरी दी गई। योजना राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों, सरकारी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा संस्थानों, पॉलिटेक्निक तथा चुनिंदा तकनीकी संस्थानों के माध्यम से लागू होगी। इसके अलावा पुलिस हिरासत में अप्राकृतिक मौत के मामलों में मुआवजा देने के लिए व्यापक नीति को मंजूरी दी गई। सामाजिक न्याय विभाग के तहत स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा संचालित करीब 2,388 सहायता प्राप्त छात्रावासों के अधीक्षकों, रसोइयों, सहायकों और चौकीदारों के मानदेय में वृद्धि का फैसला भी लिया गया। कैबिनेट ने ‘भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्वाधार योजना’ के तहत सहायता राशि बढ़ाने तथा अनुसूचित जाति और नव-बौद्ध समुदाय के विद्यार्थियों को लाभ देने का निर्णय लिया। आदिवासी विद्यार्थियों के लिए ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वयं योजना’ के तहत मिलने वाले भत्तों में भी बदलाव को मंजूरी दी गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव