महाराष्ट्र:आम बिजली ग्राहकों के फायदे के लिए ग्रिड सपोर्ट चार्ज : देवेंद्र फडणवीस
मुंबई, 24 जून (हि.स.)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को विधान परिषद में कहा कि राज्य में आम बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और विद्युत वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए ग्रिड सपोर्ट चार्ज लागू किया गया है। यह शुल्क केवल 0.13 प्रतिशत उपभोक्ताओं पर लागू होता है और इससे किसी को नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि कुछ उपभोक्ताओं को मिलने वाले अतिरिक्त लाभ में मामूली कमी कर यह व्यवस्था लागू की गई है।
मुंबई में चल रहे वर्षाकालीन सत्र के दौरान सदस्य सतेज उर्फ बंटी पाटिल ने औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिक्री कर में वृद्धि का मुद्दा उठाया। इस पर सदस्य भाई जगताप, एकनाथ खडसे और डॉ. नीलम गोरहे ने भी अनुपूरक प्रश्नों के माध्यम से चर्चा में भाग लिया।
चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ग्रिड सपोर्ट चार्ज एक फरवरी 2016 से लागू किया गया है और इसे पूर्व प्रभाव (पिछली तारीख) से लागू नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र विद्युत विनियामक आयोग (एमईआरसी) ने सरकार को अवगत कराया था कि कुछ गणनाओं में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के प्रावधान का दोहरा आकलन (डबल काउंटिंग) हुआ था। इसके बाद आयोग ने संबंधित प्रक्रिया को स्थगित कर पुनः सुनवाई शुरू की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी फीडरों पर स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य पूरा किया जा चुका है। इससे बिजली खपत संबंधी आंकड़ों की सटीक निगरानी संभव हुई है और अनुमान आधारित हस्तक्षेप की आवश्यकता समाप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि इससे वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनी है।
फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में औद्योगिक क्षेत्र के लिए बिजली दरें देश के कई राज्यों की तुलना में कम हैं। वर्ष 2025-26 में राज्य में औद्योगिक बिजली शुल्क 8.19 रुपये प्रति यूनिट है, जो तमिलनाडु, तेलंगाना और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से कम है। उन्होंने कहा कि मल्टी-ईयर टैरिफ व्यवस्था के तहत वर्ष 2029-30 तक बिजली दरों का निर्धारण किया जा चुका है और इस अवधि में महाराष्ट्र की बिजली दरें देश में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी।
औद्योगिक विकास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य में बिजली की मांग में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यदि महाराष्ट्र में बिजली की दरें वास्तव में अधिक होतीं तो उद्योग अन्य राज्यों का रुख करते, लेकिन इसके विपरीत राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है और नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि महाराष्ट्र की बिजली नीति उद्योगों के लिए अनुकूल है।
सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा दिन के समय उपयोग किया जाता है, जबकि 65 प्रतिशत मांग रात के समय बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से पूरी की जाती है। इससे विद्युत वितरण तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण (बैटरी स्टोरेज) सबसे प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है, जिससे सौर ऊर्जा का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा और बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकेगा।----------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

