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त्र्यंबकेश्वर में धर्मध्वजा फहराने के साथ सिंहस्थ कुंभ मेले का शुभारंभ, मुख्यमंत्री ने की धर्मध्वजा और धार्मिक ध्वज की पूजा

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मुंबई, 31 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर के पवित्र कुशावर्त तीर्थ के तट पर साधु-संतों, महंतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और धार्मिक जयकारों के बीच धर्मध्वजा फहराने के साथ शनिवार को सिंहस्थ कुंभ मेले का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस भव्य धार्मिक समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और श्रृंगेरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य विधुशेखर भारती मुख्य रूप से उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री सचिवालय के अनुसार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कुशावर्त तीर्थ पहुंचने पर उपस्थित साधु-संतों और महंतों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद जगद्गुरु शंकराचार्य विधुशेखर भारती का अभिनंदन किया गया। समारोह की शुरुआत पवित्र गोदावरी नदी की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। पुरोहितों ने वैदिक मंत्रों का जाप कर मां गोदावरी की स्तुति की। इसके बाद संकल्प समारोह आयोजित किया गया, जिसमें समस्त जीवों के सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की गई।

धार्मिक अनुष्ठानों का आरंभ भगवान गणेश की पूजा से हुआ। सिंहस्थ कुंभ मेले के सभी धार्मिक कार्यक्रमों और व्यवस्थाओं के निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना की गई। इसके बाद देवताओं का आह्वान कर धर्मध्वजा फहराने की अनुमति मांगी गई। गोदावरी गंगा प्रार्थना और सामूहिक मंत्रोच्चार ने समारोह की धार्मिक गरिमा को और बढ़ा दिया।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने धर्मध्वजा और धार्मिक ध्वज की पूजा की। जगद्गुरु शंकराचार्य विधुशेखर भारती ने भी ध्वज का पूजन किया। इसके बाद शंखनाद के बीच ध्वज की आरती उतारी गई। मुख्यमंत्री और शंकराचार्य ने धर्मध्वजा की परिक्रमा कर भगवान त्र्यंबकेश्वर का पूजन किया। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और जयकारों के बीच विधिवत ध्वजारोहण संपन्न हुआ। इसके बाद पवित्र गोदावरी की आरती की गई।

धर्मध्वजा का विशेष धार्मिक महत्व

सिंहस्थ कुंभ की ज्योतिषीय परंपरा में बृहस्पति का सिंह राशि में प्रवेश महत्वपूर्ण माना जाता है। धर्मध्वजा फहराना इसी पर्व की प्राचीन परंपरा का प्रतीक है। ध्वज पर सूर्य, चंद्रमा, बृहस्पति, सिंह, मगरमच्छ, ओंकार और स्वास्तिक जैसे शुभ चिह्न अंकित हैं। सूर्य और चंद्रमा अमृतकुंभ की रक्षा, जबकि बृहस्पति और सिंह सिंहस्थ के ज्योतिषीय महत्व को दर्शाते हैं। मगरमच्छ गोदावरी की तीर्थ परंपरा तथा ओंकार और स्वास्तिक आध्यात्मिकता एवं शुभता के प्रतीक माने जाते हैं। ध्वज पर अंकित बारह घंटियां, दस दिशाएं और बीज अक्षर 'हृ' भी विशेष धार्मिक महत्व रखते हैं।

इस अवसर पर विधायक हीरामन खोसकर, त्र्यंबकेश्वर की महापौर त्रिवेणी तुंगर, विशेष पुलिस महानिरीक्षक संजय ऐनपुरे, जिलाधिकारी आयुष प्रसाद, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओमकार पवार, पुलिस अधीक्षक डॉ. एस. स्वामी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। धर्मध्वजा के आरोहण के साथ त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ मेले की धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का औपचारिक आगाज हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव