आर्थिक रूप से व्यवहार्य और टिकाऊ जल परियोजनाओं पर जोर दें: फडणवीस
मुंबई, 22 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को मुंबई में कहा कि जल परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए जरूरी जमीन, रास्ते के अधिकार (राइट ऑफ वे) और अन्य अनुमतियां पहले से सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही, बिजली की लागत कम करने के लिए सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपचारित अपशिष्ट जल (ट्रीटेड वेस्टवॉटर) का उपयोग करने वाले ग्राहकों की पहचान कर परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आज मुंबई स्थित उनके आवास पर महाराष्ट्र की शहरी आधारभूत संरचना और जल परियोजनाओं को लेकर विश्व बैंक तथा इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन के प्रतिनिधिमंडल के साथ समीक्षा बैठक हुई। बैठक में परियोजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तपोषण, तकनीकी उपायों और निर्धारित समयसीमा में काम पूरा करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। विश्व बैंक के प्रतिनिधिमंडल में दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय निदेशक मारा वारविक, भारत के जल क्षेत्र प्रबंधक विलियम रेक्स और दक्षिण एशिया के बुनियादी ढांचा क्षेत्र प्रबंधक नूरू लामा सहित इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन के हर्ष गोयल, नीरज गुप्ता, ललिता श्रीनिवास तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि विश्व बैंक के साथ सहयोग केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थागत और प्रणालीगत सुधारों को गति देने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। आधुनिक तकनीक, कार्यक्षमता में सुधार और भावी पीढिय़ों के लिए उपयोगी एवं टिकाऊ व्यवस्थाएं विकसित करने में विश्व बैंक का योगदान अहम है। महाराष्ट्र सरकार पहले भी विभिन्न क्षेत्रों में विश्व बैंक के साथ काम कर चुकी है और इस सहयोग को आगे और मजबूत करने की आवश्यकता है।
बैठक में राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (मित्र) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीण परदेशी, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव नवीन सोना, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास चंद्र रस्तोगी, नगर विकास सचिव के. गोविंदराज सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

