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सूखा प्रभावित किसानों की मदद के लिए सुक्ष्म नियोजन किया जा रहा है : देवेंद्र फडणवीस

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मुंबई, 11 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि अगले छह से आठ महीनों तक किसानों, खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण नागरिकों को राहत पहुंचाने के लिए सूक्ष्म नियोजन (माइक्रो-प्लानिंग) किया जा रहा है। इसके तहत रोजगार उपलब्ध कराने, जरूरतमंदों को अनाज मुहैया कराने, पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने और पशुओं के लिए चारा-पानी की व्यवस्था करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आज मुंबई में केंद्रीय सूखा सर्वेक्षण दल के साथ सूखा संबंधी विषय पर चर्चा कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय दल ने राज्य के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक दौरा कर जमीनी हालात का जायजा लिया है। दल के सदस्यों ने ग्रामीणों और किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय दल द्वारा संवेदनशीलता के साथ किए गए सर्वेक्षण से राज्य की वास्तविक स्थिति केंद्र सरकार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मानसून के शुरुआती दो महीनों में अच्छी बारिश होने से इस वर्ष रिकॉर्ड कृषि उत्पादन की उम्मीद थी। हालांकि, फसलों में फूल आने के महत्वपूर्ण चरण के दौरान करीब दो महीने तक बारिश नहीं होने से कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ। इसका सबसे अधिक असर सोयाबीन की फसल पर पड़ा, जबकि कपास, अरहर और गन्ने की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। पानी की कमी के कारण रबी सीजन में बुवाई की संभावनाएं कम हो गई हैं। वहीं, गर्मियों की फसलों की खेती की भी संभावना नहीं के बराबर है। ऐसे में किसानों के लिए खरीफ सीजन में हुए नुकसान की भरपाई रबी या ग्रीष्मकालीन फसलों से करना मुश्किल होगा। खेती पर निर्भर छोटे किसानों और खेतिहर मजदूरों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने और खाद्य सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि, केंद्रीय अधिकारियों की तीन टीमों ने अहिल्यानगर, सोलापुर, जालना, बीड, धाराशिव, वाशिम और यवतमाल सहित विभिन्न जिलों के सूखा प्रभावित गांवों का दौरा किया। टीमों ने खेतों और जलस्रोतों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया तथा किसानों से बातचीत कर फसलों को हुए नुकसान और पानी की उपलब्धता की जानकारी जुटाई।

इस अवसर पर राहत एवं पुनर्वास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीता वेद सिंघल, राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खडग़े, जलापूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पराग जैन नैनुतिया, सहकारिता एवं विपणन विभाग के प्रधान सचिव प्रवीण दराडे, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव एकनाथ दावले, कृषि विभाग के सचिव परिमल सिंह और रोजगार गारंटी योजना विभाग के सचिव अप्पासो धुलज सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। केंद्रीय सूखा सर्वेक्षण दल के प्रमुख मुक्तानंद अग्रवाल ने भी अपने दल के सदस्यों के साथ राज्य के निरीक्षण दौरे के दौरान सामने आए तथ्यों को बैठक में प्रस्तुत किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव