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एमपीएससी आंदोलन विद्यार्थियों का नहीं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं का था : विक्रम पाचपुते

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मुंबई, 13 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक विक्रम पाचपुते ने मंगलवार को कहा कि एमपीएससी आंदोलन विद्यार्थियों का नहीं, बल्कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं का था।

विधायक पाचपुते ने मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एमपीएससी के विद्यार्थी राज्य सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले और संविधान का सम्मान करने वाले हैं। आंदोलन वापस लेने के अगले दिन स्थल पर पानी की बोतल, चार्जर, पावर बैंक या कॉफी मग जैसी चीजें नहीं मिलीं, लेकिन भारत का ध्वज और संविधान की प्रति वहां छूटे होने पर सवाल उठते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान को हाथ में लेकर और उसका हवाला देकर उसी की अवहेलना करने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि आंदोलन वापस लिए जाने के बाद विद्यार्थियों के साथ-साथ आंदोलन में शामिल विभिन्न दलों के नेताओं के मन में भी यह सवाल था कि आखिर इस आंदोलन से क्या हासिल हुआ। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने 6 तारीख को बैठक की थी, जिसके बाद 10 तारीख को भी एक और बैठक हुई।

इन बैठकों के फैसलों पर सहमति नहीं बनने के बाद 30 तारीख को मुख्यमंत्री ने रोहित पवार के प्रतिनिधिमंडल के साथ फिर बैठक की। पाचपुते के अनुसार, इस बैठक में न्यायिक जांच को लेकर हुई चर्चा की जानकारी प्रतिनिधिमंडल ने बाहर आकर मीडिया को दी थी।

पाचपुते ने आरोप लगाया कि रोहित पवार विद्यार्थियों की भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एमपीएससी अध्यक्ष का इस्तीफा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सीधे नहीं कराया जा सकता। जब आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों को लगा कि उनकी मांगों पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं, तो वे वहां से लौटने लगे। उनके मुताबिक, एक वीडियो में रोहित पवार विद्यार्थियों से रुकने की अपील करते दिखाई देते हैं, लेकिन विद्यार्थी वहां नहीं रुके। रोहित चाहते थे कि आंदोलन समाप्त कराने के लिए राहुल गांधी आएं और उसके बाद आंदोलन वापस लिया जाए। हालांकि, रोहित पवार विद्यार्थियों को बड़ी संख्या में एकजुट नहीं कर सके। इसके बाद 30 तारीख को तय किए गए मुद्दों को ही स्वीकार कर लिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव