सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पंचनामे जारी, दिवाली से पहले किसानों को सहायता देने का प्रयास: मंत्री बावनकुले
मुंबई, 06 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मंगलवार को कहा कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पंचनामे का काम जारी है। रिपोर्ट प्राप्त होते ही निर्धारित सहायता मानदंड, फसल बीमा योजना और राज्य सरकार की सहायता का समन्वय कर दिवाली से पहले किसानों को अधिकतम सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल बैठक के बाद सूखा संबंधी मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक हुई। इसमें सूखा राहत, जल भंडार, फसल एवं पानी की स्थिति, फसल ऋण और चारा नियोजन की समीक्षा की गई। बावनकुले ने कहा कि सूखा राहत उपायों में किसानों और खेतिहर मजदूरों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं को किसानों से ऋण वसूली के लिए फोन कर परेशान नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में जिला स्तर पर बैंकों की बैठकें आयोजित करने और रिजर्व बैंक के अधिकारियों से चर्चा कर आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा गया है। ई-केवाईसी के कारण लंबित फसल ऋण तत्काल उपलब्ध कराने के लिए किसानों की ई-केवाईसी पूरी की जाएगी। एग्रीस्टैक में पंजीकृत नहीं किसानों का पंजीकरण कर उन्हें केंद्र और राज्य की योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। डिजिटल फसल सर्वेक्षण से जुड़ी ऑनलाइन समस्याएं भी दूर की जाएंगी। बावनकुले ने बताया कि राज्य में चारा बैंक स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए सरकारी खाली जमीन, तालाब क्षेत्रों और जलाशयों से लगी भूमि पर घास विकसित की जाएगी। धान की पराली जलाने के बजाय उसे चारे के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाएगा। चारा बैंक के लिए कंपनियों से सीएसआर के माध्यम से सहायता लेने की भी अपील की गई है। उन्होंने कहा कि नमी और सीमित पानी वाले क्षेत्रों में रबी मौसम में चना और ज्वार को प्राथमिकता दी जाएगी। ज्वार की 100 प्रतिशत खरीद को केंद्र की मंजूरी से किसानों को राहत मिलेगी। सूखा राहत के लिए पहले 265 तालुकाओं की घोषणा की गई थी। अब 19 और तालुकाओं को शामिल कर वहां 20 प्रतिशत फसल सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया गया है। अन्य तालुकाओं को शामिल करने की मांगों की प्राथमिक जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए गए हैं। जिला नियोजन समिति की निधि से सीमेंट सडक़ों के बजाय मूलभूत सुविधाओं और सूखा राहत कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। विधानसभा एवं विधान परिषद सदस्यों को अपनी निधि से 25 लाख रुपये तक के कार्य सूखा राहत के लिए करने की अनुमति दी गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

