'अत्याचार निवारण अधिनियम' के तहत दर्ज मामलों में दोषसिद्धि की दर बढ़ाई जाए: फडणवीस
मुंबई, 03 जुलाई (हि.स.)। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को विधानभवन में कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में दोषसिद्धि (कांविंशन) की दर बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे विशेष कानूनों के अंतर्गत मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकारी वकीलों द्वारा किए गए कार्यों को उनके प्रदर्शन मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जाए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आज विधान भवन में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में सांसद हेमंत सवरा सहित समिति के सदस्य विधायक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में किसी भी मुकदमे में दो बार समझौते अथवा सुलह का प्रावधान है। इसी आधार पर राज्य में भी संबंधित कानून में आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जाए। विशेष कानूनों में भी केवल दो बार ही समझौते का प्रावधान हो, ताकि गंभीर मामलों में आरोपी कानून का दुरुपयोग कर बच न सकें।
उन्होंने निर्देश दिए कि जिन जिलों में अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अधिक मामले दर्ज होते हैं, वहाँ फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना की जाए। इससे मामलों के शीघ्र निपटारे में तेजी आएगी और पीडि़तों को कम समय में न्याय मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि गृह विभाग की मार्वल संस्था के माध्यम से यह अध्ययन किया जाए कि इन मामलों में दोषसिद्धि न होने के प्रमुख कारण क्या हैं। प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल होने तक की पूरी प्रक्रिया के लिए एक मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार की जाए। इसमें कमजोर साक्ष्य, घटनाओं की श्रृंखला तथा गवाहों के मुकर जाने जैसे पहलुओं का गहन अध्ययन शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के तहत जांच अधिकारी का पद उपविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) स्तर का होता है। इसलिए राज्यभर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशालाओं में विशेष रूप से एसडीपीओ स्तर के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाए। साथ ही, भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के अनुसार न्यायालयीन सुनवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए, ताकि गवाहों के मुकरने की घटनाओं में कमी लाई जा सके।
इस बैठक में मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव (गृह) मनीषा म्हैसकर, पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते, प्रधान सचिव (विधि एवं न्याय) दिलीप घुमरे, सचिव (जनजातीय विकास) विजय वाघमारे, अपर पुलिस महानिदेशक (नागरिक अधिकार संरक्षण) अश्विती दोरजे तथा समाज कल्याण आयुक्त दीपा मुधोल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

