अमरावती अस्पताल आगजनी मामले में स्वास्थ्य विभाग के उप अधीक्षक सहित चार अधिकारी निलंबित
मुंबई, 09 सितंबर (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को अमरावती अस्पताल आगजनी मामले में लापरवाही बरतने के आरोप के तहत चार वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य सेवा उप-निदेशक (अकोला सर्कल), अमरावती महिला अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट, अतिरिक्त जिला सिविल सर्जन (अमरावती), और अस्पताल के इलेक्ट्रीशियन शामिल हैं। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सतर्क रहने की भी हिदायत दी है।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई 24 अगस्त को अमरावती जिला महिला अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में लगी आग में तीन नवजात शिशुओं की मौत के मामले में की गई है। इन स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को सुपरविजऩ (निगरानी) में कमी के लिए शुरुआती तौर पर जिम्मेदार माना गया है।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने अस्पताल में लगी आग की जांच करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति गठित करने का आदेश जारी किया था। इस समिति की ओर से जांच रिपोर्ट सौपे जाने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने यह कार्रवाई की है।
जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, तकनीकी निरीक्षण और उपकरणों के रखरखाव में गंभीर कमियां पाई गईं। इनमें वेंटिलेटर की समय पर सर्विसिंग न होना, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम का काम न करना और फायर पंप हाउस का बंद होना शामिल है। रिपोर्ट में सामने आई लापरवाही, गैर-ज़िम्मेदाराना व्यवहार, सुपरविजऩ में विफलता और अक्षम्य असावधानी को देखते हुए, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1979 के नियम 8 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश जारी किए गए हैं। अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई का आदेश दिया गया है, साथ ही लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके अलावा शिलार कंपनी द्वारा दी जाने वाली सेवाओं में शुरुआती तौर पर कमियां पाई गईं, इसलिए फोरेंसिक रिपोर्ट में तेज़ी लाने और उसके खिलाफ भी ब्लैकलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी किए गए हैं। भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए, राज्य सरकार ने राज्य द्वारा संचालित अस्पतालों में सुरक्षा और बचाव के नियमों को काफी मज़बूत करने का फैसला किया है।
राज्य भर के सभी जिला कलेक्टरों, जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और नगर आयुक्तों को भी यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी अस्पतालों में बिजली और आग से सुरक्षा का ऑडिट तीन महीने के भीतर पूरा हो जाए। स्वास्थ्य सेवा आयुक्त से कहा गया है कि वे संबंधित जिला सिविल सर्जनों के माध्यम से सरकारी और निजी दोनों तरह के अस्पतालों में आग से सुरक्षा ऑडिट, निगरानी और अनुपालन रिपोर्टिंग को लागू करवाएं। राज्य सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि आपदा के दौरान शिशुओं को बचाने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले बहादुर अधिकारियों और कर्मचारियों को पुरस्कार और सम्मान दिया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

