महाराष्ट्र में 17 अगस्त तक पूरी होगी एन्यूमरेशन फॉर्म भरने की प्रक्रिया : एस. चोक्कालिंगम
मुंबई, 12 अगस्त (हि.स.)। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कालिंगम ने बुधवार को मुंबई में कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार महाराष्ट्र में स्पेशल इन-डेप्थ वेरिफिकेशन के तहत घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म भरने और जमा करने की प्रक्रिया 17 अगस्त तक पूरी की जाएगी। इसके बाद 24 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कालिंगम आज मंत्रालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। चोक्कालिंगम ने कहा कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद मतदाताओं को नाम जोडऩे, हटाने और विवरण में सुधार के लिए एक महीने का समय मिलेगा। 24 अगस्त के बाद नए नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6, नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 और पता, मोबाइल नंबर, फोटो सहित अन्य विवरणों में सुधार के लिए फॉर्म-8 भरा जा सकेगा। 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए मतदाता और अन्य स्थानों से आए पात्र नागरिक भी आवेदन कर सकेंगे। एन्यूमरेशन फॉर्म और पिछली वोटर लिस्ट में नाम या उम्र में अंतर पाए जाने पर संबंधित मतदाता से आवश्यक दस्तावेज मांगे जाएंगे। जिन मतदाताओं का नाम, माता-पिता या दादा-दादी का नाम 2002 की वोटर लिस्ट से मैच नहीं हुआ है, उनके दस्तावेजों की भी जांच होगी। इसके बाद 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशित की जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि जिन मतदाताओं के फॉर्म उपलब्ध नहीं हो पाए हैं, उनकी ‘अनकलेबल’ सूची जिले और विधानसभा क्षेत्र के अनुसार प्रकाशित की जा रही है। इसमें मृत्यु, स्थानांतरण, दोहरी प्रविष्टि या संबंधित मतदाता के उपलब्ध नहीं होने जैसे मामले शामिल हैं। ये सूचियां जिलों की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं और रोज अपडेट की जाएंगी। उन्होंने मतदाताओं और राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों से नियमित रूप से सूची जांचने की अपील की।
चोकालिंगम ने बताया कि राज्य में अब तक करीब 77.77 प्रतिशत एन्यूमरेशन फॉर्म का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है। लगभग 18.46 प्रतिशत फॉर्म जमा नहीं हो सके हैं, जबकि 3.78 प्रतिशत मामले प्रक्रिया में हैं। मुंबई शहर और मुंबई उपनगर में करीब 63 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज हो चुके हैं, जबकि लगभग 30 प्रतिशत फॉर्म उपलब्ध नहीं हुए और 7 प्रतिशत मामले प्रक्रिया में है। चोक्कालिंगम ने कहा कि मुंबई जैसे महानगरीय क्षेत्रों में प्रवासी आबादी के कारण ऐसे मामलों की संख्या अधिक है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि 2002 की वोटर लिस्ट में नाम मैच न होने या दस्तावेज उपलब्ध न होने पर भी फॉर्म भरने में संकोच न करें। आवश्यक दस्तावेज बाद में जमा करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए। यदि किसी मतदाता ने कई जगह फॉर्म प्राप्त किए हैं, तो केवल एक स्थान पर पंजीकरण रखा जाए। दोहरी प्रविष्टि पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव

