ठाणे सिविल रजोनिवृति कक्ष सुर्ख़ियों में, कंट्री हेड एंड्रिया ने किया दौरा
मुंबई,21 अगस्त ( हि.स.) । ठाणे सिविल हॉस्पिटल में शुरू किया गया रजोनिवर्ती कक्ष,( मेनोपॉज़ वार्ड) अब दुनिया भर में पहचान बना रहा है ताकि मेनोपॉज़ के दौरान महिलाओं को होने वाली हेल्थ प्रॉब्लम्स के लिए समय पर इलाज और काउंसलिंग मिल सके। यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (UNFPA) की कंट्री हेड एंड्रिया वोजनार के एक डेलीगेशन ने ठाणे सिविल हॉस्पिटल का दौरा किया और महाराष्ट्र में मेनोपॉज़ की पहलों का जायज़ा लिया।
इस मौके पर, एंड्रिया ने हॉस्पिटल में महिलाओं के लिए बनाए गए मेनोपॉज़ वार्ड का अवलोकन किया। उन्होंने मेनोपॉज़ के दौरान महिलाओं को एक ही जगह पर ज़रूरी गाइडेंस, टेस्ट, इलाज और परामर्श देने की पहल की तारीफ़ की। उन्होंने बताया कि सरकारी हॉस्पिटल से आम महिलाओं को मिलने वाली यह सुविधा खास तौर पर ज़रूरी है।
एंड्रिया ने कहा कि महाराष्ट्र में चल रही इस मेनोपॉज़ पहल से मिला अनुभव और तरीका भारत के दूसरे हिस्सों और दुनिया भर के देशों तक पहुंचने में काम आ सकता है। इसलिए, ठाणे सिविल में शुरू किया गया यह कक्ष न सिर्फ़ लोकल महिलाओं के लिए, बल्कि मेनोपॉज़ हेल्थकेयर के लिए एक मिसाल बनने की क्षमता रखता है।
मेनोपॉज़ के दौरान हॉर्मोन में बदलाव से नींद की समस्या, दिमागी परेशानी, जोड़ों में दर्द, हड्डियों का कमज़ोर होना और दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं। ऐसे समय में, महंगे प्राइवेट इलाज के बजाय सरकारी हॉस्पिटल में एक्सपर्ट गाइडेंस और इलाज की सुविधा मिलना आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं के लिए बड़ी राहत है।
इस मौके पर डिस्ट्रिक्ट सर्जन डॉ. कैलाश पवार, अतिरिक्त जिला सर्जन डॉ. धीरज महानगड़े, गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सचिन घोलप, डॉ. शोभना चव्हाण, डॉ. श्रेया शेल्के, विनोद जोशी ने बोर्ड को मेनोपॉज़ पहल के बारे में बताया और सिविल हॉस्पिटल का काम दिखाया।
उन्होंने हॉस्पिटल की दीवारों के बाहर रहकर महिलाओं की असल सेहत संबंधी ज़रूरतों तक पहुँचने और इसे मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान के लिए ठाणे सिविल की इस पहल की तारीफ़ की। इस डेलीगेशन में अनुजा गुलाटी, पिंकी प्रधान वगैरह मौजूद थीं।
नेशन पापुलेशन फंड की कंट्री हेड एंड्रिया वोजनार ने कहा कि -ठाणे सिविल हॉस्पिटल में मेनोपॉज़ के दौरान महिलाओं के लिए शुरू की गई यह सुविधा बहुत ही सराहनीय और संवेदनशील पहल है। आम महिलाओं को एक ही जगह पर गाइडेंस, काउंसलिंग और इलाज मिलना एक बड़ी उपलब्धि है। महाराष्ट्र में यह नई पहल भारत समेत दुनिया के दूसरे देशों के लिए प्रेरणा देने वाली हो सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

