ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ 20 मई को विरोध प्रदर्शन का ऐलान
मुंबई, 10 मई (हि.स.)। ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्मों की बढ़ती पहुंच, भारी डिस्काउंट और घर-घर दवा डिलीवरी की सुविधा ने पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स के सामने बड़ा अस्तित्व संकट खड़ा कर दिया है। इसके विरोध में मुंबई सहित देशभर के दवा विक्रेताओं ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।
खुदरा दवा विक्रेताओं का कहना है कि ऑनलाइन कंपनियों की आक्रामक मूल्य नीति के कारण उनके कारोबार, ग्राहकों की संख्या और मुनाफे में लगातार गिरावट आ रही है। दवा विक्रेताओं ने आरोप लगाया है कि कई ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की बिक्री, नकली दवाओं के प्रसार और मरीजों के मेडिकल डेटा के दुरुपयोग जैसी गंभीर अनियमितताओं को बढ़ावा दे रहे हैं। इसी के विरोध में दवा व्यापारियों ने 20 मई को देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है। दवा विक्रेताओं का आरोप है कि कॉरपोरेट समर्थित ई-फार्मेसी कंपनियां बाजार पर कब्जा जमाने के लिए घाटे में दवाएं बेच रही हैं।
खुदरा फार्मासिस्टों के मुताबिक, इस बदलाव का सबसे बड़ा असर मोहल्लों की पारंपरिक मेडिकल दुकानों पर पड़ा है, जहां पहले से सीमित मुनाफा अब और कम हो गया है। मुंबई महानगर क्षेत्र में करीब 7 हजार पंजीकृत फार्मेसी हैं। इनमें से कई दुकानदारों ने पिछले कुछ वर्षों में ग्राहकों की संख्या और बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की है।
रिटेल एंड डिस्पेंसिंग केमिस्ट्स एसोसिएशन के संगठनात्मक सचिव अजय जोशी ने आरोप लगाया कि ई-फार्मेसी कंपनियां स्थानीय विक्रेताओं की खरीद लागत से भी कम कीमत पर दवाएं बेच रही हैं। जोशी ने कहा कि ये कंपनियां घाटे में दवाएं बेचकर पहले खुदरा विक्रेताओं को खत्म करना चाहती हैं और बाद में बाजार पर नियंत्रण कर मुनाफा कमाने की योजना बना रही हैं। उन्होंने दावा किया कि ऑनलाइन फार्मेसियां पहले ही दवा बाजार का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा अपने कब्जे में ले चुकी हैं।
जोशी ने प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि शेड्यूल एच, एच1 और एक्स श्रेणी की दवाएं केवल पंजीकृत डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जानी चाहिए, लेकिन कई प्लेटफॉर्म सिर्फ फोन पर परामर्श के आधार पर दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि आखिर यह कौन सुनिश्चित करता है कि फोन पर सलाह देने वाला व्यक्ति योग्य डॉक्टर है या कोई टेलीकॉलर।
महाराष्ट्र राज्य रसायनशास्त्र व औषधि संघ के महासचिव अनिल नवंदर ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन फार्मेसियों के विस्तार से नकली दवाओं का खतरा भी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि अवसाद, अनिद्रा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं बिना उचित चिकित्सकीय पर्चे के ऑनलाइन बेची जा रही हैं, जो मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
दवा व्यापारियों का कहना है कि जहां उपभोक्ताओं को कम कीमत का फायदा मिल रहा है, वहीं कई अनियमित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म एक्सपायरी डेट के करीब पहुंच चुकी दवाएं और संदिग्ध गुणवत्ता की दवाएं बाजार में उतार रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि समय रहते ई-फार्मेसी क्षेत्र के लिए सख्त नियम लागू नहीं किए गए, तो पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

