गहराया मराठी भाषा विवाद, परिवहन मंत्री ने बुलाई बैठक
मुंबई, 26 अप्रैल (हि.स.)। महाराष्ट्र में एक मई से टैक्सी- ऑटो रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने का मुद्दा गहराता जा रहा है। बढ़ते विवाद को देखते हुए परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने सोमवार को मंत्रालय में संबंधित अधिकारियों और टैक्सी- ऑटो रिक्शा चालकों की यूनियन के प्रतिनिधियों को बैठक बुलाई है।
इस बैठक में शिंदे गुट के नेता संजय निरूपम, कामगार नेता शशांक राव सहित विभिन्न टैक्सी- ऑटो रिक्शा चालक यूनियन के पदाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों आमंत्रित किया गया है। बैठक में गैर-मराठी चालकों को मराठी भाषा सिखाने के लिए क्या-क्या प्रय़ास किए जा रहे हैं और मामले का हल निकालने पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। दरअसल राज्य सरकार ने 1 मई 2026 से राज्य में लाइसेंसधारी ऑटो रिक्शा और टॅक्सीचालकों को मराठी भाषा बोलना अनिवार्य करने का फैसला किया है। इसमें ओला-उबर जैसे ऐप आधारित चालक भी शामिल हैं. प्रादेशिक व उपप्रादेशिक परिवहन कार्यालयों की तरफ से टैक्सी चालकों की जांच करने की मुहिम चलाई जाएगी. जिन चालकों को मराठी लिखना और पढ़ना नहीं आता उनके परमिट रद्द किए जाएंगे। इस फैसले को रद्द करने की मांग उठ रही है। इसके खिलाफ टैक्सी-ऑटो चालकों ने 4 मई से हड़ताल पर जाने का एलान किया है। हड़ताल पर अड़े शशांक राव की नेतृत्व वाली मुंबई ऑटो रिक्शा-टैक्सी मेंस यूनियन ने 28 अप्रैल तक अल्टीमेटम सरकार को दिया है। यूनियन की ओर से सोमवार को गोरेगांव पश्चिम में एक सभा का आयोजन किया गया है। इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। इधर मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने धमकी दी है कि देखते हैं मुंबई बंद कैसे होती है. जिन्हे मराठी से एतराज है, वे अपने राज्य में वापस चले जाएं.
अमित ठाकरे ने चेतावनी दी है कि हम सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं। यदि ऑटो चालकों को इससे कोई एतराज़ है, तो वे अपने राज्य चले जाएं। बाहरी लोग यहां आकर मुंबई बंद कर देंगे? हम मराठी लोगों के साथ मज़बूती से खड़े हैं। मराठी का सम्मान होना ही चाहिए। उनकी हड़ताल से हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मराठी ऑटो चालक ड्राइवर 12 घंटे गाड़ी चलाने को तैयार हैं। कट्टरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उन्हें सड़क पर सबक सिखाया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

