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सेवा क्षेत्रों में मराठी अनिवार्य करें, दक्षिणी राज्यों की नीति लागू हो

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मुंबई,24 अप्रैल ( हि.स.) । वरिष्ठ पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत सिनकर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक मेमोरेंडम देकर मांग की है कि तमिलनाडु, कर्नाटक जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों की तरह महाराष्ट्र में भी मराठी भाषा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने लेटर में सर्विस सेक्टर में मराठी भाषा को ज़रूरी बनाने की ज़ोरदार मांग की है।

डॉ. सिनकर ने कहा है कि यह बहुत दुख की बात है कि अगर उनके अपने राज्य में कोई मराठी व्यक्ति मराठी में बातचीत नहीं कर पाता है। उन्होंने मेमोरेंडम में बताया कि कई प्रवासी रिक्शा, टैक्सी और होटल जैसे सर्विस सेक्टर में काम कर रहे हैं, और आम आदमी को मराठी न जानने की वजह से बहुत परेशानी हो रही है।

राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक द्वारा रिक्शा चालकों के लिए मराठी को ज़रूरी बनाने के फैसले का स्वागत करते हुए, डॉ. सिनकर ने इस नियम को असरदार तरीके से लागू करने की ज़रूरत बताई। उनका कहना है कि सिर्फ़ कागज़ों पर नियम बनाकर नहीं, बल्कि व्यवहार में मराठी का इस्तेमाल बढ़ाया जाना चाहिए।

डॉ. सिनकर ने सरकार से कुछ ज़रूरी मांगें की हैं। इनमें सर्विस सेक्टर के कर्मचारियों के लिए मराठी की कम से कम जानकारी ज़रूरी करना, रिक्शा-टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी सर्टिफ़िकेट ज़रूरी करना और जिन्हें मराठी नहीं आती उनके लिए सरकार की तरफ़ से फ़्री ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने जैसे अच्छे सुझाव शामिल हैं।

उन्होंने तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए कहा, महाराष्ट्र में सबको जगह मिलती है, लेकिन मराठी भाषा का सम्मान बनाए रखना आज की ज़रूरत है।

ठाणे के पर्यावरणविद डॉ प्रशांत ने कहा कि -महाराष्ट्र में रहते हुए मराठी में बातचीत न कर पाना सिर्फ़ एक समस्या नहीं है, बल्कि पहचान का दर्द है। सर्विस सेक्टर में मराठी को ज़रूरी बनाना किसी पर मजबूरी नहीं है, बल्कि लोकल भाषा के साथ न्याय करने की कोशिश है। मुझे उम्मीद है कि सरकार इस बारे में जल्द फ़ैसला लेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा