E-20 आंदोलन के बीच गडकरी को बड़ी राहत, पोस्ट की तो होगी कार्रवाई
मुंबई, 27 जुलाई (हि.स.)। नीट पेपर लीक मामले को लेकर सीपेजी आंदोलन के बाद देश में ई-20 आंदोलन नया रूप ले रहा है। ई-20 आंदोलन के आयोजकों ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद का घेराव करने का एलान किया है। इस बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने गडकरी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है कि यदि गडकरी के खिलाफ सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट किया गया तो संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
सीपेजी आंदोलन के बाद नया आंदोलन खड़ा हो गया है. अब सोशल मीडिया पर ई-20 फ्यूल के खिलाफ आंदोलन की चर्चा है। इस ऑनलाइन आंदोलन को भी सीपेजी की तरह अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। 'ई-20 जनता पार्टी' नाम के सोशल मीडिया अकाउंट को लाखों लोगों ने फॉलो किया है। आरोप है कि ई-20 फ्यूल वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचाता है। इस पर गडकरी और उनके परिवार की कंपनी को घेरा जा रहा है। गडकरी ने मानहानि को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने गडकरी को राहत देते हुए सोशल मीडिया पर कंटेंट फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री गडकरी को ई-20 एथेनॉल नीति के नाम पर उनके और उनके परिवार के खिलाफ फैलाए जा रहे भ्रामक दावों, डीपफेक वीडियो और मानहानि कंटेंट के खिलाफ सोशल मीडिया पर दीवानी मुकदमा करने की अनुमति दी है। न्यायाधीश अभय आहूजा ने याचिका स्वीकार करते हुए गडकरी को कानूनी कार्रवाई की छूट दी है। गडकरी की ओर से कोर्ट में दायर की गई याचिका में स्पष्ट किया गया कि ई-20 नीति का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है। गडकरी व उनके परिवार का इससे कोई व्यावसायिक लाभ नहीं जुड़ा है। यह अनुमति अज्ञात कंटेंट निर्माताओं और भ्रामक प्रचार करने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ दी गई है। सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज हो सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

