गर्भाशय उल्टा होने पर प्रसूता को ठाणे सिविल अस्पताल में मिला नया जीवन
मुंबई,07 जुलाई ( हि.स.) । हालांकि बच्चे का जन्म एक कुदरती प्रक्रिया है, लेकिन यह ज़रूरी है कि यह विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में और अच्छी सुविधाओं वाली हेल्थ फैसिलिटी में हो। ठाणे के सिविल हॉस्पिटल में एक ऐसी घटना हुई, जिससे पता चलता है कि इसे विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में और अच्छी सुविधाओं वाली चिकित्सा करवाना कितना ज़रूरी है। सिविल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक पहली बार माँ बनने वाली महिला का इलाज किया, जो घर पर बच्चे को जन्म देने के बाद बहुत क्रिटिकल कंडीशन में भर्ती हुई थी, और न सिर्फ उसकी जान बचाई, बल्कि उसके होने वाले मातृत्व को भी सुरक्षित रखने में कामयाब रहे।
भिवंडी में रहने वाली एक 23 साल की महिला को डिलीवरी के तीसरे दिन प्रसव के तत्काल बाद गर्भाशय उल्टा होने पर (एक्यूट प्यूरपेरल यूटेराइन इनवर्जन )और बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग हुई। उसे ऐसी जानलेवा कंडीशन में सिविल हॉस्पिटल लाया गया था। मेडिकल टीम ने उसे भर्ती करते ही तुरंत इलाज शुरू कर दिया। ज़िला सर्जन डॉ. कैलाश पवार और एडिशनल ज़िला सर्जन डॉ. धीरज महानगड़े की देखरेख में हॉल्टेन की सर्जरी करने का फ़ैसला किया गया। गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. बालाजी चौरे ने बताया कि बहुत ही कुशल सर्जरी से यूट्रस को सफलतापूर्वक ठीक कर दिया गया।
सर्जरी के बाद, यूट्रस पूरी तरह से ढीला पड़ गया, जिससे एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। हालाँकि, चूँकि मरीज़ एक पहली बार माँ बनने वाली महिला थी, इसलिए उसके यूट्रस को बचाने के लिए सभी मेडिकल उपाय किए गए और आखिरकार उसके यूट्रस को बचा लिया गया। फ़िलहाल, मरीज़ की हालत स्थिर है और उसमें सुधार हो रहा है।
इस सफल सर्जरी को करने में गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. बालाजी चौरे, डॉ. अश्विनी पुरी, डॉ. अरुणा बेलुरे, एनेस्थेटिस्ट डॉ. रूपाली यादव, मनाली देवगड़े और मिलिंद डोंडे ने अहम भूमिका निभाई।
ठाणे जिला सिविल अस्पताल के सर्जन डॉ कैलाश पवार का इस संदर्भ में कहना है -प्रसव घर पर करने की बात नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में किसी अच्छी सुविधाओं वाले हॉस्पिटल में होनी चाहिए। समय पर इलाज और इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी से माँ और बच्चे की जान बच सकती है। सुरक्षित मातृत्व के लिए, हर परिवार को जागरूक होना समय की ज़रूरत है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

