home page

अलीबाग समुद्री तट पर दिखे काले दाग, ड्राफ्ट टार बॉल्स मैनेजमेंट रूल्स पर सवाल

 | 

मुंबई, 07 मई (हि.स.)। महाराष्ट्र के अलीबाग के समुद्र तटों पर मानसून से पहले एक बार फिर काले टार बॉल्स की वापसी ने समुद्री प्रदूषण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आवाज़ फाउंडेशन ने केंद्र सरकार की ड्राफ्ट टार बॉल्स मैनेजमेंट रूल्स 2026 पर कई आपत्तियां उठाई हैं और प्रदूषण फैलानेवालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

कोंकण तट के अलीबाग समुद्र तट पर वर्षों से दिखाई दे रहे टार बॉल्स और तेल रिसाव को लेकर केंद्र सरकार के सामने गंभीर चिंता जताई गई है। फाउंडेशन ने मांग की है कि मछुआरों, पर्यावरणविदों, स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों को निगरानी समिति में शामिल किया जाए, तेल रिसाव से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए और पोल्यूटर पे सिद्धांत लागू करते हुए प्रदूषण फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। फाउंडेशन की ट्रस्टी सुमैरा अब्दुलाली ने पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को टार बॉल्स मैनेजमेंट रूल्स 2026 के मसौदे पर विस्तृत सुझाव और आपत्तियां भेजी हैं।

दावा किया गया है कि वर्ष 2001 से अलीबाग के समुद्र तटों पर हर मानसून से पहले टार बॉल्स दिखाई देते रहे हैं। टार बॉल्स केवल समुद्री प्रदूषण का मामला नहीं, बल्कि यह समुद्री जैव विविधता, मछुआरों की आजीविका, पर्यटन और इंसानी स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है। तेल रिसाव और टार बॉल्स की निगरानी व सफाई में नागरिकों, पर्यावरणविदों, मछुआरों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। बिना पारदर्शिता और जवाबदेही के इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।

फाउंडेशन ने मांग की है कि सरकार तेल रिसाव और टार बॉल्स से जुड़े सभी परीक्षण डेटा को सार्वजनिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराए। साथ ही पोल्यूटर पे सिद्धांत लागू करते हुए प्रदूषण फैलाने वाले जहाजों और कंपनियों पर कड़े जुर्माने लगाए जाएं। पश्चिमी तट पर बढ़ते बंदरगाह विकास और जहाजों की आवाजाही के कारण भविष्य में छोटे लेकिन लगातार होने वाले तेल रिसाव बढ़ सकते हैं। केवल सफाई नहीं, बल्कि रोकथाम और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान देना जरूरी है। केंद्र सरकार से मसौदा अधिसूचना को अंतिम रूप देने से पहले व्यक्तिगत सुनवाई की मांग की गई है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार