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दशहरे रैली से पहले ठाकरे सेना में मतभेद, राऊत के बयान पर चतुर्वेदी को एतराज

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मुंबई, 20 अक्टूबर (हि.स.)। शिवसेना (यूबीटी) की दशहरा रैली से पहले ही पार्टी में अंदरूनी मतभेद सामने आए हैं। पार्टी सांसद संजय राऊत के बयान के बाद महिला नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने नाराजगी जताई है।

देश में पिछले कई दिनों से एसआईआर और चुनाव में गड़बड़ी को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली समेत अलग-अलग शहरों में छात्र और विपक्षी पार्टियां विरोध कर रही हैं। इस आंदोलन में ठाकरे गुट भी हिस्सा ले रहा है। पार्टी सांसद संजय राऊत ने अल्बानिया में हुई हिंसा का हवाला देते हुए सरकार को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि 'अल्बानिया में लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया। लोग इसलिए गुस्से में थे क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भ्रष्ट प्रधानमंत्री की मदद कर रहा था। विरोध कर रही जनता ने संसद और सरकारी ऑफिस के साथ-साथ मंत्रियों के घरों पर भी हमला किया। सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में सत्ता परिवर्तन होकर रहेगा। कोई सत्ता का अमर पट्टा लेकर नहीं आया है. सत्ता परिवर्तन का एलगार शिवसेना की दशहरा रैली से होगा।

ठाकरे सेना की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राऊत के बयान पर एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि भारत को दूसरे देशों से सीखने की ज़रूरत नहीं है। भारत में जब सत्ता में बदलाव हुआ तो वह लोकतांत्रिक तरीके से हुआ। आपातकाल के बाद भी लोकतांत्रिक तरीकों से सत्ता में बदलाव हुआ था। भारत के लोगों को कानून-व्यवस्था में रुकावट नहीं डालनी चाहिए। भारत में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की ज़रूरत नहीं है। अल्बानिया एक छोटा देश है। उनके देश में लेफ्ट कई वर्षों तक सत्ता में था। लोगों का कानून अपने हाथ में लेना और सुप्रीम कोर्ट या संसद पर हमला करना मंजूर नहीं है। जो लोग कह रहे हैं कि बांग्लादेश को अल्बानिया के आंदोलन से प्रेरणा लेनी चाहिए, उनके लिए यह बहुत दुख की बात है। शुरू में आंदोलन में छात्र थे। बाद में मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन को अपने हाथ में ले लिया। इस आंदोलन में हिंदू माइनॉरिटी भी शामिल है। लेकिन हिंसक तरीके से सत्ता बदलना सही नहीं है।

इधर शिवसेना (शिंदे गुट) की सांसद ज्योति वाघमारे ने ठाकरे गुट पर यह कहते हुए हमला बोला है कि उन्हें दशहरा रैली मनाने का हक नहीं है। आप बाघ नहीं कॉकरोच हैं। असली शिवसेना हमारी है। ठाकरे सेना बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से हटकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी की चाटुकारिता कर रही है। शरद पवार के सिल्वर ओक आवास पर नतमस्तक हो रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार