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हिम्मत है तो 2023 में मंज़ूर महिला आरक्षण लागू करो - वर्षा गायकवाड

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मुंबई, 22 अप्रैल (हि.स.)। महिला आरक्षण का मुद्दा उठाकर भाजपा सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल नहीं बल्कि कॉन्स्टिट्यूएंसी रीऑर्गेनाइजेशन बिल हार गया, क्योंकि महिला आरक्षण बिल 2023 में एकमत से मंज़ूर हो गया था, वह कानून भी बन गया है, लेकिन भाजपा सरकार उसे लागू नहीं कर रही है। हिम्मत है तो इसे लागू किया जाना चाहिए। इन शब्दों में मंगलवार को मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष व सांसद वर्षा गायकवाड ने भाजपा पर हमला बोला।

मुंबई कांग्रेस के कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वर्षा ने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा ने चुनाव क्षेत्रों को संगठित करके देश को बांटने की साज़िश रची थी और इस शातिर साज़िश को इंडिया गठबंधन ने नाकाम कर दिया है। 'नारी वंदना' के मुखौटे के पीछे संसदीय ढांचे को बदलने की एक छिपी हुई साजिश है। यह महिलाओं के प्रतिनिधित्व का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि लोकतंत्र को कमजोर करने की एक कोशिश है। इसका मकसद चुनाव क्षेत्रों को इस तरह से असंगठित करना है जिससे उन्हें राजनीतिक फायदा हो। इससे उत्तर भारत में चुनाव क्षेत्र बढ़ेंगे और दक्षिण भारत में चुनाव क्षेत्र तुलनात्मक रूप से कम होंगे। इससे बड़ा राजनीतिक फायदा भाजपा को होगा।

उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत का हिस्सा 24% से घटकर 21% हो जाएगा। गोवा को एक सीट का नुकसान होगा। उत्तर पूर्व भारत का हिस्सा 4.7% से घटकर 4.0% हो जाएगा। 'हिंदी बेल्ट' का हिस्सा 33% से बढ़कर 38% हो जाएगा। 'हिंदी बेल्ट' को कुल 133 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी, जबकि पूरे दक्षिण भारत को मिलाकर देखें तो सिर्फ़ 44 सीटों की बढ़ोतरी होगी। अकेले उत्तर प्रदेश को 58 नई सीटें मिलेंगी, जो सभी पांच दक्षिण भारत के राज्यों की कुल बढ़ोतरी से भी ज़्यादा है। 'नारी शक्ति वंदन एक्ट' पहले ही कानून बन चुका है। अभी 543 सीटों वाली लोकसभा में अगर यह एक्ट लागू होता है, तो महिलाओं के लिए लगभग 181 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। महिला आरक्षण को 'डीलिमिटेशन' से जोड़ने के पीछे यही असली वजह है। ओबीसी के लिए बिना सब-कोटा के महिला आरक्षण सिर्फ़ एक खोखला वादा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार