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ठाणे में जुलाई में 649 पेड़ धराशाई,जन जीवन अस्त व्यस्त

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ठाणे में जुलाई में 649 पेड़ धराशाई,जन जीवन अस्त व्यस्त


ठाणे में जुलाई में 649 पेड़ धराशाई,जन जीवन अस्त व्यस्त


मुंबई,02 अगस्त ( हि.स.) । आकस्मिक जलवायु परिवर्तन और एल नीनो के असर ने ठाणे में पेड़ गिरने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। मनपा से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 1 से 30 जुलाई 2026 तक, ठाणे नगर निगम की सीमा में 649 पेड़ गिरे, जबकि 271 पेड़ों की टहनियाँ टूट गईं। इन घटनाओं से जन जीवन अस्त व्यस्त हुआ है।यह आंकड़ा सिर्फ़ भारी बारिश का ही नहीं है, बल्कि शहर के पेड़ संरक्षण, शहरी प्लानिंग और नगर निगम के पेड़ मैनेजमेंट पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

इसी दौरान पेड़ों और टहनियों के गिरने की कुल 920 घटनाएँ दर्ज की गईं। इसलिए, इन घटनाओं को सिर्फ़ प्राकृतिक आपदाओं के तौर पर देखने के बजाय, इनके पीछे के पर्यावरण और इंसानों द्वारा बनाए गए कारणों का अध्ययन करने की ज़रूरत है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, पेड़ सिर्फ़ भारी बारिश के कारण नहीं गिरते हैं। शहर में सड़कों, फुटपाथों और दूसरे विकास कार्यों के दौरान पेड़ों के ठूंठों के चारों ओर बड़ी मात्रा में सीमेंट-कंक्रीट का काम किया जाता है। इस वजह से जड़ों को हवा, पानी और कुदरती फैलाव नहीं मिल पाता। कई जगहों पर डेवलपमेंट के काम के दौरान जड़ों को नुकसान भी होता है। नतीजतन, पेड़ों की ज़मीन पर पकड़ कमज़ोर हो जाती है और तेज़ बारिश या हवा में वे आसानी से गिर जाते हैं।

पर्यावरणविद डॉ प्रशांत ने बताया कि -इस साल जुलाई माह में एल नीनो के असर के बावजूद, ठाणे में उम्मीद से ज़्यादा बारिश हुई। क्लाइमेट चेंज की वजह से, कम समय में भारी बारिश, तेज़ हवाएं और मिट्टी में बढ़ती नमी ने पहले से कमज़ोर पेड़ों पर और दबाव डाला है। इसलिए, क्लाइमेट चेंज और पेड़ों के ठीक से मैनेजमेंट न होने का दोहरा असर अब साफ़ दिख रहा है,।

पेड़ों का रेगुलर 'ट्री हेल्थ ऑडिट', साइंटिफिक प्रूनिंग, ठूंठ के आस-पास ढीली मिट्टी और बारिश का पानी ज़मीन में जाने देने का सिस्टम अभी भी उम्मीद के मुताबिक गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। सिर्फ़ पेड़ लगाना ही नहीं, बल्कि पेड़ों की सेहत और बचाव ज़्यादा ज़रूरी है। जुलाई में 649 पेड़ और 271 डालियां गिरने का आंकड़ा ठाणे के लिए एक चेतावनी है।

डॉ सिनकर का मानना है कि पेड़ गिरने की घटनाओं को सिर्फ़ कुदरती आफ़त के तौर पर नहीं देखा जा सकता। अगर पेड़ों की सेहत, जड़ों की सुरक्षा और साइंटिफिक ट्री मैनेजमेंट को लगातार नज़रअंदाज़ किया गया तो ऐसी घटनाएं बढ़ती रहेंगी। अब पेड़ लगाने के साथ-साथ पेड़ों के संरक्षण को भी उतनी ही प्राथमिकता देने की ज़रूरत है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा