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गांव से लेकर जिला अस्पताल तक हेल्थ केयर

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मुंबई, 23 अगस्त (हि.स.)। महाराष्ट्र में स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा क्षेत्र में अहम कदम उठाया है। लोगों को उनकी ज़रूरतों के हिसाब से अच्छी, आसान और समय पर हेल्थ सेवाएं मुहैया कराने के लिए उनकी गुणवत्ता तय की गई है।

स्वास्थ्य़ मंत्री प्रकाश आबिटकर के अनुसार गांव के अस्पतालों से लेकर उप- जिला, जनरल और जिला अस्पतालों तक किस स्तर पर कौन सी हेल्थ सुविधाएं, स्पेशलिस्ट डॉक्टर, टेस्ट, मैनपावर, दवाइयां और सप्लीमेंट्री सर्विसेज़ मिलनी चाहिए, इसकी साफ़ आउटलाइन तय कर दी गई है। इस फैसले से राज्य के सरकारी अस्पतालों में हेल्थ सेवाओं को अधिक सिस्टमैटिक और असरदार बनाने में मदद मिलेगी। लोगों के लिए अपनी जरूरतों के हिसाब से सही स्वास्थ्य संगठन चुनना आसान होगा। स्वास्थ्य सिस्टम पर लोगों का विश्वास मजबूत होगा। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि ग्रामीण हॉस्पिटल से लेकर 30, 50 और 100 बेड वाले उप जिला हॉस्पिटल, जनरल हॉस्पिटल और जिला अस्पताल तक, अलग-अलग स्तर पर मिलने वाली सेवाएं के लिए क्राइटेरिया तय किए गए हैं। हॉस्पिटल की कैपेसिटी और सर्विस लेवल को ध्यान में रखते हुए, स्पेशलिस्ट मेडिकल सर्विसेज़, नर्सिंग, एलाइड हेल्थ और पैरामेडिकल मैनपावर, लैबोरेटरी, रेडियोलॉजी और दूसरी मरीज सेवाओं की उपलब्धता तय की गई है। अस्पताल स्तर के हिसाब से फिजिशियन, सर्जन, गाइनेकोलॉजिस्ट और ऑब्सटेट्रिशियन, पीडियाट्रिशियन, ऑर्थोपेडिक स्पेशलिस्ट, ऑप्थल्मोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, डेंटिस्ट वगैरह जैसी स्पेशलिस्ट सेवाओं को शामिल किया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर जरूरी इलाज के इंतजाम को बढ़ावा मिलेगा। इससे मरीजों को इलाज के लिए दूर के शहरों में जाने की जरूरत कम होगी।

स्वासथ्य मंत्री ने बताया कि डायग्नोस्टिक सेवाओं के लिए साफ स्टैंडर्ड भी तय किए गए हैं ताकि सुनिश्चित हो सके कि लोगों को लोकल लेवल पर जरूरी टेस्ट मिल सकें। ग्रामीण अस्पतालों में 76 तरह के डायग्नोस्टिक टेस्ट, 100 बेड वाले उप जिला अस्पतालों में 110 और जिला अस्पतालों में 122 तरह के डायग्नोस्टिक टेस्ट की उपलब्धता तय की गई है। इससे इन तीन लेवल पर 308 तरह के डायग्नोस्टिक टेस्ट की बात साफ़ हो गई है। इनमें ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन, अलग-अलग ब्लड टेस्ट, लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल, HbA1C, थायरॉइड, पैप स्मीयर और अलग-अलग इंफेक्शन वाली बीमारियों के टेस्ट शामिल हैं। हॉस्पिटल लेवल पर, एक्स-रे और सोनोग्राफी जैसी रेडियोलॉजी सुविधाएं देने पर जोर दिया गया है। 100 से ज़्यादा बेड की कैपेसिटी वाले अस्पतालों में सीटी स्कैन और जिला अस्पताल स्तर पर एमआरआई सुविधाएं तय की गई हैं। इससे गंभीर बीमारियों का तेजी से और सही पता लगाने में मदद मिलेगी। लोगों को सरकारी हेल्थ सिस्टम में मॉडर्न डायग्नोस्टिक सुविधाओं का फ़ायदा मिलेगा।

अच्छी हेल्थकेयर के लिए डॉक्टरों के साथ-साथ ट्रेंड नर्सिंग और पैरामेडिकल मैनपावर के लिए हॉस्पिटल के हिसाब से नियम तय किए गए हैं। इनमें लैब टेक्नीशियन, ईसीजी टेक्नीशियन,एकस- रे टेक्नीशियन, ब्लड बैंक मैनपावर, डाइटीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, मेडिकल सोशल वर्कर और साइकेट्रिक सोशल वर्कर शामिल हैं। नेशनल हेल्थ मिशन के जरिए पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूशन को एक्स्ट्रा मैनपावर भी उपलब्ध कराया गया है। इनमें 111 सुपर स्पेशलिस्ट, 1,519 स्पेशलिस्ट, 2,919 मेडिकल ऑफिसर, 3,005 आयुष मेडिकल ऑफिसर और 11,571 स्टाफ नर्स शामिल हैं। मैटरनल और चाइल्ड हेल्थ, डायलिसिस और ब्लड सर्विसेज़ को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही पता चल सकेगा कि कौन सा हॉस्पिटल कौन सी सर्विस देगा, कौन से स्पेशलिस्ट डॉक्टर मौजूद रहेंगे, कौन से टेस्ट किए जाएंगे और कौन सी सुविधाएं मिलेंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार