home page

पुलिस हिरासत में मौत रोकने गाइडलाइन जारी

 | 

मुंबई, 29 जुलाई (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग ने पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों को रोकने और उनकी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक गाइडलाइन जारी की है। यह फैसला मानवाधिकारों की सुरक्षा करने और हिरासत में मौत के मामलों में पुलिस की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से लिया गया है। इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है।

निर्णयानुसार मुंबई में कस्टोडियल डेथ के मामलों की जांच क्राइम ब्रांच और शेष महाराष्ट्र में राज्य अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) को सौंपी जाएगी। घटना के तुरंत बाद संबंधित पुलिस स्टेशन को आकस्मिक मृत्यु दर्ज करनी होगी। घटनास्थल और सीसीटीवी फुटेज को पूरी तरह सुरक्षित रखना होगा, ताकि सबूतों से कोई छेड़छाड़ न हो सके। नए नियम में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के अनुसार गिरफ्तारी से पहले आरोपी की मेडिकल जांच को अनिवार्य किया गया है। अगर पुलिस की लापरवाही से मौत साबित होती है, तो मृतक के परिजनों को 1 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। वहीं, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर यह राशि 1.5 लाख रुपए होगी।

पुलिस स्टेशनों के प्रवेश- निकासी द्वार, जेलों और पूछताछ कक्ष में नाइट विजन व ऑडियो रिकॉर्डिंग वाले सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस डिजिटल डेटा का बैकअप 18 महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, हिरासत में मौत होने पर कम से कम तीन डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम किया जाएगा। उसकी पूरी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार