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भूमिपुत्रों के सम्मान में कोपरी - चेंदनी रखें नए स्टेशन का नाम कर - डॉ प्रशांत

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भूमिपुत्रों के सम्मान में कोपरी - चेंदनी रखें नए स्टेशन का नाम कर - डॉ प्रशांत


मुंबई,06 अप्रैल ( हि.स.) । वरिष्ठ पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत रवींद्र सिनकर ने एक बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ज़ोरदार मांग की है कि ठाणे और मुलुंड स्टेशनों के बीच बनने वाले नए रेलवे स्टेशन का नाम ‘कोपरी-चेंदनी’ रखा जाए ताकि ठाणे के असली बेटे भूमिपुत्रों के बलिदान को सम्मान दिया जा सके।

16 अप्रैल, 1853 को देश की पहली ट्रेन मुंबई और ठाणे के बीच चली थी। चेंदनी कोलीवाड़ा के कोली समुदाय ने इस ऐतिहासिक घटना के लिए अपनी बहुत सारी ज़मीनें कुर्बान की थीं। इसी तरह, ठाणे के पूर्वी हिस्से में कोपरी गांव के आगरी समुदाय ने भी शहर के विकास में अहम योगदान दिया है। डॉ. सिनकर ने बयान में कहा है कि इन दोनों समुदायों के योगदान को ध्यान में रखते हुए नए स्टेशन का नाम ऐसा रखना अच्छा रहेगा।

आज तेज़ी से हो रहे शहरीकरण की वजह से चेंदनी कोलीवाड़ा दो हिस्सों, ईस्ट और वेस्ट में बंट गया है, जिससे लोकल कम्युनिटी की पहचान पर असर पड़ा है। कोली और आगरी कम्युनिटी की पारंपरिक पहचान, कल्चर और वजूद को बचाना बहुत बड़ी चिंता का विषय बन गया है। इसी बैकग्राउंड में, डॉ. प्रशांत सिनकर ने एक बयान में कहा है, यह नामकरण सिर्फ़ एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि एक अहम फ़ैसला होगा जो ठाणे शहर के असली निवासियों के वजूद का सम्मान करेगा और उनके बलिदान को मानेगा। इससे आने वाली पीढ़ियाँ भी हमारे शहर के शानदार इतिहास से वाकिफ़ होंगी।

ठाणे शहर की असली पहचान यहाँ के कोली और आगरी समुदाय ने ही बनाई है। इसलिए, डॉ. सिनकर ने इस बयान के ज़रिए केंद्र सरकार से रिक्वेस्ट की है कि प्रस्तावित रेलवे स्टेशन का नाम 'कोपरी-चेंदनी' रखकर इन धरतीपुत्रों की पहचान का सम्मान किया जाए। अब सबका ध्यान केंद्र सरकार के जवाब पर है।

डॉ प्रशांत सिनकर का कहना है कि - ठाणे चेंदनी कोलीवाडी के भूमिपुत्रों की पहचान को विकास के रास्ते पर चलते हुए यहां की असली संस्कृति और इतिहास को कुचला न जाए, इसलिए हम 'कोपरी-चेंदनी' नाम पर ज़ोर दे रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा