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बकाया भुगतान को लेकर अड़े सरकारी ठेकेदार

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मुंबई, 07 अप्रैल (हि.स.)। महायुति सरकार पर ठेकेदारों का बिल बकाया 96,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। बिलों का भुगतान न होने से सरकारी ठेका लेनेवाले ठेकेदार परेशान हैं। महाराष्ट्र स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने आक्रामक रुख अपनाते हुए मंगलवार से राज्य में सभी विकास के काम रोकने की चेतावनी दी है।

ठेकेदारों के मुताबिक पिछले डेढ़ साल में बकाया 1.16 लाख करोड़ रुपये हो गया था। आंदोलन के बाद सरकार ने 20,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया, लेकिन जैसे ही नए कामों के बिल मिले, यह आंकड़ा फिर से 96,000 करोड़ के पार हो गया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष मिलिंद भोसले ने बताया कि हमें उम्मीद थी कि सरकार 31 मार्च को वित्तीय वर्ष खत्म होने तक बड़े बकाए का भुगतान कर देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब हमारे पास काम रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने बताया कि जलजीवन मिशन व महाराष्ट्र जीवन अथॉरिटी पर 35,000 करोड़, लोकनिर्माण विभाग- 29,000 करोड़, जिला वार्षिक योजना- 11,000 करोड़, जल संसाधन विभाग- 9,000 करोड़, ग्रामीण व जल संरक्षण विभाग- 6,500 करोड़, पर्यटन विकास कॉर्पोरेशन- 3,800 करोड़, नगर विकास स्पेशल फंड- 2,100 करोड़ रुपए ठेकेदारों का बकाया है।

ठकेदारों का आरोप है कि राज्य सरकार के तिजोरी पर इस समय बहुत दबाव है। साल 2024 के विधान सबा चुनाव के लिए अलग-अलग योजनाओं के लिए करोड़ों रुपये दिए गए थे। लेकिन विकास कार्यों के बिलों का अभी तक भुगतान नहीं किए गए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने 1.38 लाख करोड़ रुपये का लोन लिया, फिर भी कैपिटल खर्च सिर्फ 98,000 करोड़ रुपये तक ही सीमित रहा। सिर्फ बड़े ठेकेदार ही नहीं, बल्कि निकाय संस्थाओं के माध्यम से काम करने वाले छोटे ठेकेदार भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। मजदूरों की सैलरी और कच्चे माल का भुगतान न होने से सप्लाई चेन में रुकावट आई है। ठेकेदार अपने काम बंद आंदोलन पर अड़े रहे तो सड़क, निर्माणाधीन परियोजनाओं, पानी की सप्लाई और सिंचाई परियोजनाओं के काम प्रभावित हो सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार