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‘रिजॉल्व मोर, रेफर लेस’ फॉर्मूले पर सरकार का अभियान

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मुंबई, 09 (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार ने ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए ‘रिजॉल्व मोर, रेफर लेस’ फॉर्मूले पर अमल करने का फैसला किया है। इस प्रशिक्षण अभियान के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिर और उपकेंद्रों को मिनी हेल्थ कमांड सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा।

राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश में सीएचओ, एएनएम, एमपीडब्ल्यू और आशा कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण देकर टीबी, हाई बीपी, डायबिटीज, कैंसर स्क्रीनिंग, मानसिक स्वास्थ्य और मातृ-शिशु सेवाओं को गांव स्तर पर ही अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने जीआर जारी कर दिया है। वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य के प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर दो दिवसीय रेसिडेंशियल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रशिक्षण तहसील स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय अथवा संबंधित पब्लिक हेल्थ सेंटर में होगा।

इसके तहत राज्य भर में करीब 3872 प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बदलती बीमारी प्रवृत्तियों के कारण टीबी, डेंगू, मलेरिया जैसे संक्रामक रोगों के साथ हाई बीपी, डायबिटीज, कैंसर और हृदय रोग जैसे असंक्रामक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा मातृ-शिशु स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य, वृद्ध देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य और पेलिएटिव केयर जैसी सेवाओं को गांव स्तर पर मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य कर्मियों के कौशल विकास पर जोर दिया गया है।

प्रशिक्षण में गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, संस्थागत प्रसव, नवजात एवं शिशु देखभाल, टीकाकरण, परिवार नियोजन, टीबी स्क्रीनिंग, कैंसर जांच, मानसिक स्वास्थ्य, आपातकालीन चिकित्सा सेवा, मौखिक स्वास्थ्य, आंख-कान की जांच और योग-आयुष पद्धति जैसे विषय शामिल रहेंगे। गांवों में गृहभेट, हेल्थ कैंप और समुदाय स्तर पर जनजागरूकता अभियान भी प्रशिक्षण का हिस्सा होंगे। दूसरे दिन स्वास्थ्य कर्मी 10 से 25 परिवारों के घर जाकर प्रत्यक्ष संवाद करेंगे।

हर जिले में 10 से 15 मास्टर ट्रेनर्स नियुक्त किए जाएंगे, जिनका चयन जिला स्वास्थ्य अधिकारी और जिला शल्य चिकित्सक करेंगे। प्रशिक्षण के बाद भी मास्टर ट्रेनर्स स्वास्थ्य कर्मियों को सुपरवाइजरी मेंटरिंग देंगे। इसके लिए व्हॉट्सऐप ग्रुप बनाकर ‘कम्युनिटी ऑफ प्रैक्टिस’ तैयार की जाएगी, ताकि बेस्ट प्रैक्टिस और समस्याओं का साझा समाधान हो सके। कार्यक्रम का खर्च 15वें वित्त आयोग निधि से किया जाएगा। साथ ही इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान के दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार