home page

सद्गुरु का ज्ञान मनुष्य के जीवन से दूर करता है अज्ञान का अंधकार: महात्मा अंबालिका बाई जी

 | 
सद्गुरु का ज्ञान मनुष्य के जीवन से दूर करता है अज्ञान का अंधकार: महात्मा अंबालिका बाई जी


मुंबई, 08 नवंबर, (हि.स.)। पालघर जिले के वसई पूर्व में मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से श्रीहंस विजय नगर आश्रम में दीपावली के अवसर पर सद्भावना सम्मेलन हुआ।

इस मौके पर महात्मा अंबालिका बाई जी ने अपने संदेश में सद्गुरुदेव सतपाल जी महाराज की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना गुरु के कल्याण नहीं होता। सत्संग का वास्तविक अर्थ सत्य से मिलन कराना है। जब मनुष्य सत्संग के माध्यम से सत्य को समझता है, तब उसके मन की शंकाओं का निवारण होता है और जीवन को सही दिशा प्राप्त होती है।

उन्होंने सद्गुरुदेव महाराज जी के प्रवचनों का सार समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार एक चिकित्सक रोग का निदान करके उचित औषधि प्रदान करता है, उसी प्रकार सद्गुरु मनुष्य के भीतर व्याप्त अज्ञान रूपी रोग को पहचानकर ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं। सद्गुरु द्वारा प्रदान किया गया ज्ञान ही मनुष्य के जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर सत्य और आत्मबोध के प्रकाश की ओर अग्रसर करता है। गुरु का उद्देश्य केवल उपदेश देना नहीं, बल्कि मनुष्य की दृष्टि को स्पष्ट करना और उसे जीवन के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराना है।

महात्मा अंबालिका बाई जी ने सभी प्रेमी भक्तों एवं उनके परिवारजनों को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि यह दीपोत्सव सभी के जीवन में ज्ञान, प्रेम, शांति, सुख-समृद्धि एवं आध्यात्मिक प्रकाश लेकर आए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार दीपक स्वयं प्रज्वलित होकर दूसरों को प्रकाश देता है, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सेवा, सद्भावना और परोपकार के माध्यम से समाज में सकारात्मकता का प्रकाश फैलाना चाहिए।

इस दौरान उन्होंने नाशिक के सिंहस्थ महाकुंभ के ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह एवं महागोदावरी आरती के पावन अवसर पर मानव उत्थान सेवा समिति, नाशिक शाखा द्वारा लगभग 8,500 आदिवासी बंधुओं एवं श्रद्धालुओं के लिए नाश्ते एवं भोजन वितरण के सराहनीय सेवा कार्यों की सराहना की।

इस सेवा कार्य में मुंबई, पुणे एवं नाशिक के क्षेत्रों से पहुंचे प्रेमी भक्तों, मानव सेवा दल, युवा दल, नारी सेवा दल तथा शाखा एवं आश्रम के कार्यकर्ताओं ने पूरे उत्साह, समर्पण और अनुशासन के साथ अपनी सहभागिता निभाई थी। अंत में उन्होंने सभी सेवाभावी भक्तों का पुनः धन्यवाद करते हुए कहा कि 'मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है' की भावना के साथ किया गया प्रत्येक निःस्वार्थ कार्य समाज में प्रेम, एकता, भाईचारे और मानवता को मजबूत बनाता है।

सद्भावना सम्मेलन में महात्मा आचार्यानंद जी, महात्मा समानंद जी, महात्मा हरिप्रेमानंद जी एवं महात्मा नीलमणि बाई जी ने भी भक्तों का मार्गदर्शन किया।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / कुमार