टीएमसी हर गणेशोत्सव पूर्व गढ्ढे भरने का स्थाई हल खोजे - डॉ प्रशांत
मुंबई,26 अगस्त (हि. स.)। ठाणे महापौर श्रीमती शर्मिला पिंपोलकर ने गणेशोत्सव से पहले ठाणे में प्रशासनिक अधिकारियों को सड़कों के गढ्ढे तुरंत ही भरने के आदेश दिए हैं।विगत। 21 अगस्त 2026को गणेशोत्सव से पहले विसर्जन आदि की समीक्षा करते हुए ठाणे मेयर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि ठाणे में पर्यावरणाकुल इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव मनाने के लिए सदके साफ सुथरी और गढ्ढे रहित होना चाहिए । उन्होंने यह माना कि प्रति वर्ष गणेशोत्सव की तैयारियों में सड़कों के रख रखाव में बहुत ही खर्च होता है । महापौर के इस वक्तव्य के बाद ठाणे में पर्यावरणविद डॉ प्रशांत ने भी इस मामले में सीएम फडणवीस को पत्र लिखकर ध्यान आकर्षित किया है है प्रति वर्ष हजारों रुपए खर्च कर सड़कों के गढ्ढे भरने का एक ही तरीका क्यों? हमेशा ही गणेश उत्सव से पूर्व टीएमसी पहले मानसून से पहले गड्ढे पैच करो, अब उसी तर्ज पर चंद दिनों बाद ही गणेशोत्सव से पहले फिर पैच करो... हर साल एक ही फॉर्मूला क्यों अपनाया जाता है? भिवंडी और नासिक में गड्ढों की वजह से हुई जानों के बाद, पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत सिनकर ने राज्य के मुख्य मंत्री से मांग की है कि ठाणे की सड़कों के लिए भी सिर्फ पैचिंग ही नहीं, बल्कि परमानेंट उपाय किए जाएं। गौर तलब है कि मुख्यमंत्री सचिवालय ने उनकी बात पर ध्यान दिया है और उसे शहरी विकास (2) विभाग को भेज दिया है।
ठाणे शहर में सैकड़ों करोड़ रुपये की लागत से कंक्रीट और मैस्टिक एस्फाल्ट सड़कें बनाई गई हैं। लेकिन, जब मानसून का मौसम शुरू होता है, तो कई जगहों पर फिर से गड्ढे हो जाते हैं। इसलिए, सड़कें बनाने में करोड़ों खर्च करने और उन्हीं सड़कों पर फिर से गड्ढे पैच करने का यह सिलसिला बंद होना ज़रूरी है।
सीएम को लिखे पत्र में डॉ प्रशांत ने कहा है कि अच्छी सड़कों को अक्सर पानी की सप्लाई, ड्रेनेज, गैस पाइपलाइन, बिजली और टेलीकम्युनिकेशन के कामों के लिए खोदा जाता है। काम पूरा होने के बाद, सड़क को अक्सर पहले जैसी क्वालिटी के हिसाब से रिपेयर किए बिना कुछ समय के लिए पैच कर दिया जाता है। बारिश का पानी जमा होने के बाद, उसी जगह पर फिर से गड्ढे हो जाते हैं। इसलिए, यह तय करना ज़रूरी है कि सड़क किसने, क्यों और कितनी देर तक खोदी, साथ ही खुदाई के बाद रेस्टोरेशन की क्वालिटी कैसी थी।
ठाणे शहर के लिए एक अलग ‘रोड एक्सकेवेशन एंड रेस्टोरेशन पॉलिसी’ लागू की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि सड़क खोदने से पहले परमिशन ज़रूरी की जाए, अलग-अलग एजेंसियां मिलकर काम करें, काम पूरा करने की एक तय डेडलाइन तय की जाए, और क्वालिटी चेक करने के बाद ही सड़क को ट्रैफिक के लिए खोला जाए।
नई बनी कंक्रीट और मैस्टिक एस्फाल्ट सड़कों के लिए एक वारंटी पीरियड तय किया जाना चाहिए। अगर इस दौरान सड़क खराब होती है, तो संबंधित कॉन्ट्रैक्टर उसे रिपेयर करवाए। यह भी मांग है कि लोगों का पैसा फिर से घटिया काम पर खर्च करने का चलन बंद किया जाए।
ठाणे के पर्यावरणविद डॉ प्रशांत सिनकर ने कहा है कि -हर साल गड्ढे भरना कोई पक्का हल नहीं है। अगर करोड़ों रुपये खर्च करके सड़कें बनाने के बाद भी उन्हीं सड़कों पर गड्ढे हो रहे हैं, तो काम की क्वालिटी और मेंटेनेंस के तरीकों पर गंभीरता से सोचने करोड़ों की बर्बादी, पैचिंग का धंधा: ठाणे में गड्ढे हमेशा रहने वाली फसल हैं!
मानसून से गणेशोत्सव तक सिर्फ पैचिंग; ठाणे के लोगों के पैसे की बर्बादी रोकने और परमानेंट 'खुदाई पॉलिसी' लागू करने की जरूरत है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

