सर्दी में गर्मी का अहसास , कंकरीटीकरण से पारा 35पार
मुंबई,05 फरवरी ( हि.स.) ।ठाणे शहर में फरवरी महीने में ही सूरज की तेज़ धूप का एहसास होने लगा है, और सर्दी के बीच में भी लोगों को गर्मी का एहसास हो रहा है। पिछले दो दिनों से शहर का ज़्यादा से ज़्यादा तापमान 35 डिग्री पर है, और उम्मीद की जा रही बूंदाबांदी पूरी तरह से गायब हो गई है। पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ प्रशांत का कहना है कि यह स्थिति सिर्फ़ मौसमी बदलाव का संकेत नहीं है, बल्कि बढ़ते शहरीकरण, घटती हरियाली और क्लाइमेट चेंज की चेतावनी भी है।
ठाणे डिज़ास्टर मैनेजमेंट सेंटर के अनुसार, 4 फरवरी को शहर का ज़्यादा से ज़्यादा तापमान 35.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया था, जबकि कम से कम तापमान 23.4 डिग्री था। उसके बाद 5 फरवरी को ज़्यादा से ज़्यादा तापमान 35.2 डिग्री था, जबकि कम से कम तापमान 24.1 डिग्री था। तस्वीर यह है कि सर्दियों में उम्मीद की जा रही बूंदाबांदी पूरी तरह से गायब हो गई है। पर्यावरणविदों के अनुसार, शहरीकरण की बढ़ती रफ़्तार, तेज़ी से घटती हरियाली, गाड़ियों की बढ़ती संख्या, कंक्रीटिंग और क्लाइमेट चेंज का सीधा असर तापमान में बढ़ोतरी पर पड़ रहा है। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है, “यह एक गंभीर बात है कि सर्दी खत्म होने से पहले ही गर्मी का एहसास होने लगता है, और भविष्य में हीट वेव के और तेज़ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।”
बदलते क्लाइमेट का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है, और बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमारों का खास ध्यान रखा जा रहा है। साथ ही, पेड़ों को बचाना, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल, एनर्जी बचाना और इको-फ्रेंडली लाइफस्टाइल अपनाना आज की ज़रूरत बन गई है।पर्यावरणविद डॉ प्रशांत ने बताया कि ठाणे में असहज गर्मी से लोगों को पसीना आ रहा है, लेकिन यह पसीना सिर्फ़ गर्मी का नहीं है—यह कुदरत के दर्द का भी है। यह बढ़ता तापमान चेतावनी दे रहा है कि अगर हम समय पर नहीं जागे, तो आने वाले दिन और भी ज़्यादा गर्म होंगे। “यह बात कि सर्दियों में भी टेम्परेचर 35 डिग्री रिकॉर्ड किया जा रहा है, बहुत चिंता की बात है। यह अचानक बदलाव कुदरत की तरफ से एक चेतावनी है, और हम बढ़ते कंक्रीटिंग, तेज़ी से गायब होती हरियाली और गाड़ियों की बढ़ती संख्या का सीधा असर देख रहे हैं। इसलिए अगर शहरों ने समय रहते इको-फ्रेंडली पॉलिसी नहीं अपनाईं, तो हमें इस तरह के असामान्य टेम्परेचर बढ़ने की आदत डालनी पड़ेगी। आज जो गर्मी महसूस हो रही है, वह सिर्फ़ मौसम का नतीजा नहीं है, बल्कि इंसानी लापरवाही का भी नतीजा है।”
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

