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एसआईआर पर विपक्ष फैला रहा फर्जी नैरेटिवः सीएम फडणवीस

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मुंबई, 05 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर विपक्ष के आरोपों पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार किया है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया भारत की चुनावी व्यवस्था में कई दशकों का इतिहास रही है। बिना किसी ठोस मुद्दे के विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने के लिए फर्जी नैरेटिव चला रहा है।

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के वोट चोरी के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के चुनावों में जहां एसआईआर के कारण वोट कम हुए, वहां भी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की जीत हुई। यदि यह प्रक्रिया किसी एक पक्ष के खिलाफ होती, तो टीएमसी वहां कैसे जीतती। हर राजनीतिक दल हर बूथ पर अपना बीएलए नियुक्त कर सकता है और सूची पर आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अधिकार रखता है। प्रक्रिया में शामिल होने के बजाय विपक्ष केवल वोट चोरी का भ्रम फैला रहा है।

मुख्यमंत्री के अनुसार साल 1952 से 1956 के दौरान आयोग ने देश के अधिकांश हिस्सों में मतदाता सूची का बड़े पैमाने पर पुनरीक्षण किया। उसके बाद, देश के ज्यादातर हिस्सों में 1957, 1961, 1965 और 1966 में भी संशोधन किए गए। साल 1983–84, 1987–89, 1992, 1993 और 1995 के समय में भी पुनरीक्षण किए गए। साल 2002, 2003 और 2004 में फिर से वोटर लिस्ट का रीविजन किया गया था। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और नागरिकों के बार-बार माइग्रेशन की वजह से भी वोटर लिस्ट में बड़े बदलाव हुए हैं। पिछले दो दशकों में, वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में नाम जोड़े और हटाए गए हैं। समय के साथ, नए पात्र वोटरों के जुड़ने, मौत, माइग्रेशन और एक जगह से दूसरी जगह रजिस्ट्रेशन की वजह से वोटर लिस्ट बदलती रहती है। इसलिए, समय-समय पर वेरिफिकेशन जरूरी है। पात्र लोगों को वोटर लिस्ट में शामिल करना और किसी भी पात्र नागरिक को बाहर न करना चुनाव आयोग के ज़रूरी उद्देश्यों में से एक है। यह चुनावी सिस्टम में एक लंबे समय से चली आ रही प्रक्रिया है। मौजूदा एसआईआर उसी रिवीजन का अगला चरण है।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार