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ठाणे पर्यावरण में मूर्ति विसर्जन प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन करें

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ठाणे पर्यावरण में मूर्ति विसर्जन प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन करें


मुंबई,01 जून ( हि.स.) । ठाणे शहर गणेश उत्सव के दौरान ईस्ट भाग में ठाणे क्रीक में गणेश मूर्ति विसर्जन का पर्यावरण पर सही असर पता लगाने के लिए एक साइंटिफिक स्टडी की मांग की गई है। जैविक विविधता (बायोडायवर्सिटी) से भरपूर ठाणे क्रीक के पानी की क्वालिटी, पानी के जीवों और पक्षियों के रहने की जगहों पर होने वाले असर का सही अंदाज़ा लगाने की ज़रूरत बताई जा रही है।

हर साल, शाडू की मिट्टी की मूर्तियाँ बनाने, मानव निर्मित विसर्जन तालाब, लोगों को जागरूक करने वाले अभियान और पर्यावरण पूरक गणेशोत्सव के लिए अलग-अलग गतिविधियों पर बहुत पैसा खर्च किया जाता है। हालाँकि, यह बात सामने आ रही है कि इन प्रयासों का पर्यावरण पर कितना अच्छा असर पड़ा है, और लोगों का रिस्पॉन्स कितना बढ़ा है, इसका सही अंदाज़ा जन साधारण में उपलब्ध नहीं है।

पर्यावरणविदों के अनुसार, हालांकि शाडू की मिट्टी पर्यावरण के लिए काफ़ी अच्छी है, लेकिन अगर एक ही समय में और एक ही पानी के सोर्स में हज़ारों मूर्तियों को विसर्जित किया जाता है, तो क्रीक में मिट्टी की मात्रा, पानी की क्वालिटी, पानी के जीवों पर असर और बायोडायवर्सिटी पर संभावित बुरे असर की पूरी स्टडी ज़रूरी है। खास तौर पर, क्योंकि ठाणे क्रीक इलाका फ्लेमिंगो और दूसरे पक्षियों के लिए एक ज़रूरी हैबिटैट है, इसलिए पर्यावरण पर पड़ने वाले असर की रेगुलर मॉनिटरिंग ज़रूरी है।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने क्रीक में विसर्जन के असर की एक इंडिपेंडेंट साइंटिफिक स्टडी, इको-फ्रेंडली कोशिशों के असर का असेसमेंट और सेंसिटिव क्रीक इलाकों के लिए एक खास प्रोटेक्टिव पॉलिसी बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है। वे आर्टिफिशियल विसर्जन तालाबों, घर पर विसर्जन, मूर्ति रीसाइक्लिंग और दूसरे इको-फ्रेंडली ऑप्शन को और बढ़ावा देने की ज़रूरत भी बताते हैं।

डॉ प्रशांत सिनकर का कहना है कि -ठाणे क्रीक में गणेश मूर्तियों के विसर्जन के पर्यावरण पर पड़ने वाले असर की साइंटिफिक स्टडी के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक रिप्रेजेंटेशन दिया गया है। क्रीक की बायोडायवर्सिटी को बचाने के लिए आस्था और पर्यावरण के बीच बैलेंस बनाए रखना समय की ज़रूरत है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा