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को-ऑपरेटिव सोसाइटियों के चुनाव टले

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मुंबई, 28 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की 20,000 से ज्यादा कोऑपरेटिव सोसाइटियों के चुनाव टालने का फ़ैसला किया है। इसकी वजह सूबे की 304 तहसीलों में सूखे की स्थिति और राहत काम में व्यस्त प्रशासनिक सिस्टम को बताया गया है। इस संबंध में सहकारिता विभाग ने शासनादेश जारी किया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस सरकारी फैसले को विधान परिषद की पांच सीटों और गोकुल मिल्क यूनियन चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है.

महाराष्ट्र सरकार ने सूखाग्रस्त जिलों में सहकारी समितियों के चुनाव स्थगित कर दिए हैं। इसका असर हजारों किसानों पर पड़ेगा। इस फैसले से अगले दो महीने और अगले साल होने वाले चुनावों पर ब्रेक लग जाएगा। इसका असर जिला को-आपरेटिव बैंक, चीनी मिलों और यार्न मिलों समेत विभिन्न कोऑपरेटिव सोसाइटियों के चुनावों पर पड़ेगा. सरकार ने तर्क दिया है कि चुनावी प्रक्रिया जारी रखने से महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी सूखा राहत प्रयासों से हट जाएंगे। राजस्व, कृषि और जलापूर्ति सहित विभिन्न विभाग पहले से ही इन कार्यों में शामिल हैं। किसानों और सदस्यों को भी इस संकट के दौरान चुनावों में भाग लेने में काफी असुविधा होगी। चुनाव टालने का निर्णय अगले आदेश तक जारी रहेगा। हालांकि, कुछ विशिष्ट श्रेणियां में छूट दी गई हैं। हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत आने वाली समितियां पर यह निर्णय जारी नहीं होगा। यह निर्णय उन समितियां पर भी लागू नहीं होगा, जहां नामांकन चरण शुरू हो गया है. मुंबई और ठाणे जिले के कोऑपरेटिव बैंक, जिन सोसाइटियों के चुनाव के लिए कोर्ट ने आदेश दिया है और जिन सोसाइटियों का चुनाव प्रक्रिया 27 अक्टूबर, 2026 से पहले शुरू हो गई थी, उन्हें इस फैसले से बाहर रखा गया है.

हाल ही में महायुति को गोकुल मिल्क यूनियन और विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिली. अब चर्चा शुरू हो गई है कि इन नतीजों की वजह से कोऑपरेटिव सोसाइटियों के चुनाव टाले गए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार