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मराठी अनिवार्यता के खिलाफ डाइवरों ने दायर की याचिका

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मुंबई, 25 अगस्त (हि.स.)। गैर-मराठी चालकों के लिए सामान्य मराठी भाषा की अनिवार्यता के फैसले पर विवाद बढ़ गया है। ऑटो रिक्शा-टैक्सी ड्राइवरों ने अपने रोजी-रोटी का हवाला देते हुए महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर जल्द ही सुनवाई होने की संभावना है। याचिका में महाराष्ट्र सरकार की मराठी भाषा अनिवार्यता के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि मुंबई एक बहुभाषी शहर है। मुंबई में साढ़े नौ लाख अमराठी टैक्सी- ऑटो रिक्शा चालकों की रोज़ी-रोटी पर सवाल खड़ा हो गया है। ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। मोहम्मद कासिम अहमद समेत चार ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों ने यह याचिका फाइल की है। याचिका में कहा गया है कि सरकार का नोटिफिकेशन संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 के तहत रोजगार करने के उनके फंडामेंटल राइट्स का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि यह नोटिफिकेशन मोटर व्हीकल एक्ट के प्रोविजन्स के खिलाफ है। याचिका में ध्यान दिलाया गया है कि यह कानून ड्राइविंग लाइसेंस लेने या रखने के लिए किसी भाषा की जरूरत नहीं डालता है।

याचिका में इस नियम के आर्थिक रूप से कमजोर और बाहर से आए ड्राइवरों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई गई है। याचिकाकर्ताओं ने डर जताया है कि यदि मराठी भाषा की आवश्यकता पूरी नहीं की गई, तो उनके बैज निलंबित और उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार