बच्चों से संवाद सफल पितृत्व की नींव ” – डॉ. सैम न्यूटन ( वैज्ञानिक न्यूटन के वंशज)
मुंबई,24 जून ( हि.स.) । “बच्चों के व्यवहार को समझने के लिए, उनसे लगातार बातचीत करना, उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें प्यार भरा और सुरक्षित माहौल देना ज़रूरी है। “बच्चों के साथ बातचीत सफल (पेरेंटिंग) पितृत्व की असली नींव है,” दुनिया भर में मशहूर साइकोलॉजिस्ट, एजुकेशनिस्ट (आइज़ैक न्यूटन की 14वीं पीढ़ी के वंशज) डॉ. सैम न्यूटन ने कहा।
वे प्रादेशिक मनोचिकित्सालय अस्पताल , ठाणे में पेरेंटिंग स्किल्स, एडोलसेंट मेंटल हेल्थ और डिजिटल युग में चुनौतियों पर एक खास लेक्चर में बोल रहे थे।
डॉ. न्यूटन ने बचपन से लेकर किशोरावस्था और युवावस्था तक बच्चों के मानसिक भावनात्मक, और सामाजिक विकास के अलग-अलग स्टेज पर डिटेल में गाइडेंस दी। उन्होंने कहा कि आज के तेज़ और टेक्नोलॉजी से भरे युग में माता-पिता के लिए बच्चों की इमोशनल दुनिया को समझना सबसे बड़ी ज़रूरत है।
सोशल मीडिया के बढ़ते असर, मोबाइल और इंटरनेट के ज़्यादा इस्तेमाल की वजह से बच्चों की मेंटल हेल्थ को आ रही मुश्किलों की ओर ध्यान दिलाते हुए, उन्होंने डिजिटल डिसिप्लिन की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘पेरेंटल कंट्रोल्स’ के सही इस्तेमाल, बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटीज़ पर पॉज़िटिव मॉनिटरिंग और परिवार में बातचीत बढ़ाकर कई दिक्कतों से बचा जा सकता है।
लेक्चर का खास आकर्षण यह था कि उन्होंने “इनसाइड आउट” और “मोआना” जैसी पॉपुलर फ़िल्मों के उदाहरण देकर गाइड किया। उन्होंने समझाया कि ऐसी फ़िल्मों का इस्तेमाल बच्चों के भावनात्मक विकास के लिए किया जा सकता है, जिसमें इमोशनल इंटेलिजेंस, सेल्फ-अवेयरनेस, रिश्ते, ज़िम्मेदारी और ज़िंदगी की वैल्यूज़ को अच्छे से दिखाया जा सकता है। प्रोग्राम में बड़ी संख्या में मेडिकल ऑफिसर, नर्सिंग ऑफिसर, मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल और साइकेट्रिक हॉस्पिटल के स्टाफ़ शामिल हुए।
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ठाणे मनोचिकित्सालय के अधीक्षक डॉ नेताजी मुलिक ने कहा है कि - बच्चों की मेंटल हेल्थ बनाए रखना सिर्फ़ माता-पिता की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की मिलकर ज़िम्मेदारी है। सही गाइडेंस, सेंसिटिविटी और बातचीत से हम एक इमोशनली काबिल और ज़िम्मेदार पीढ़ी बना सकते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

