बदलते विकसित ठाणे को तस्वीरों से दर्शाएं - डीसीएम शिन्दे
मुंबई ,17 अगस्त (हि. स.) । एक तस्वीर सिर्फ़ एक पल की कहानी नहीं होती, बल्कि उस एक फोटो के ज़रिए हज़ारों शब्द कहे जाते हैं। तस्वीर देखने के बाद, लोगों को उस घटना या हालात का एहसास होता है। साथ ही, तस्वीरों के ज़रिए पुरानी यादें भी ताज़ा हो जाती हैं। ठाणे बदल रहा है.. राज्य के उप मुख्य मंत्री एकनाथ शिंदे ने आज ठाणे में कहा कि फोटोग्राफरों को ठाणे के विकास को तस्वीरों के ज़रिए दिखाना चाहिए, फोटोग्राफर को अपनी 'तीसरी आँख' लगातार खुली रखनी होगी।
वे वर्ल्ड फोटोग्राफी डे के मौके पर ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और ठाणे शहर दैनिक पत्रकार संघ की तरफ से मनपा भवन में आयोजित एक फोटोग्राफी नुमाइश के उद्घाटन पर बोल रहे थे। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन उप मुख्य मंत्री एकनाथ शिंदे ने किया। कार्यक्रम में सांसद नरेश म्हस्के, महापौर शर्मिला पिंपोलकर, सदन के नेता हनमंत जगदाले, विपक्ष के नेता अशरफ शानू पठान, अतिरिक्त आयुक्त प्रशांत रोडे, तथा, ठाणे शहर दैनिक पत्रकार संघ के दिलीप शिंदे सहित पत्रकार संघ के पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य और बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद थे।
एक फोटोग्राफर शब्दों से परे अपनी बात कह देता है। एक पूरी घटना या हालात को एक फोटो के ज़रिए अच्छे से दिखाया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए सिर्फ़ हाथ में कैमरा होना काफ़ी नहीं है, बल्कि सही पल को कैद करने की स्किल, हालात की जानकारी और समझदारी का सही इस्तेमाल ज़रूरी है। कुछ पल कभी वापस नहीं आते। इसलिए, सही समय पर सही पल को कैद करने वाला इंसान ही सही मायने में एक बेहतरीन फोटोग्राफर बनता है, ऐसा शिंदे ने कहा। उन्होंने बताया कि एक अच्छी फोटो लेने के लिए ऑब्ज़र्वेशन, सब्र और सही टाइमिंग बहुत ज़रूरी है। उन्होंने बताया कि पत्रकार बहनों ने भी शानदार फोटो खींची हैं।
ठाणे शहर तेज़ी से डेवलप हो रहा है, और शहर के पुराने और नए रूप को तस्वीरों के ज़रिए नागरिकों तक पहुंचाने की ज़रूरत है। पहले की तंग सड़कें और अब नई चौड़ी सड़कें, बदला हुआ परिवहन प्रणाली, शहर में बढ़ती सुविधाएं और साथ ही ठाणे के डेवलपमेंट का सफ़र तस्वीरों के ज़रिए दिखाया जा सकता है। इसलिए, उप मुख्य मंत्री शिन्देने यह भी सुझाव दिया कि अगले साल होने वाली फोटो प्रदर्शनी 'ठाणे बदल रहा है' विषय पर लगाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुराने ठाणे से आधुनिक और विकसित ठाणे तक के सफ़र को तस्वीरों के ज़रिए नागरिकों के सामने पेश किया जाए, तो यह एक एतिहासिक दस्तावेज बन जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

