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विकास के बहाने शहरी ढांचा बदलने से हरियाली का विनाश

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विकास के बहाने शहरी ढांचा बदलने से हरियाली का विनाश


मुंबई,25 मार्च ( हि.स,.) । ठाणे जिले के पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत रवींद्र सिनकर ने हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के नाम पर मुंबई-ठाणे में चल रहे ' नियोजित वृक्षों की कटाई' को तुरंत रोकने की राज्य सरकार से मांग की है। उन्होंने इस बात पर गंभीर चिंता जताई है कि बढ़ते शहरीकरण के कारण तेजी से हो रही पेड़ों की कटाई शहरों के इकोलॉजिकल बैलेंस पर गंभीर असर डाल रही है।डॉ प्रशांत ने चिंता प्रगट की है कि जिस तरफ से ठाणे मुंबई दिनों दिन हरियाली से विमुख हो रहे वह एक अदृश्य तपते रेगिस्तान

मुंबई और ठाणे शहर तेजी से 'अर्बन हीट आइलैंड्स'( शहरी रेगिस्तान पठार) में बदल रहे हैं, और बढ़ती कंक्रीटिंग के कारण तापमान काफी बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुराने, ऊंचे पेड़ों को जानबूझकर प्रगति की दौड़ में अवरोध मानकर नष्ट किया जा रहा है। पेड़ों के तनों में ज़हरीले रसायन डालना, जड़ों के चारों ओर कंक्रीट डालना और रात के अंधेरे में पेड़ों की गैर-कानूनी कटाई, ये सभी ऐसे ही कामों के उदाहरण हैं। उन्होंने लेटर में बताया है कि यह बड़े पैमाने पर हो रहा है।

उन्होंने बताया कि यह नियंत्रण के बाहर है। पेड़ों की कटाई से शहर का सुप्त ज्वालामुखी बन रहा है, वायू प्रदूषण और सांस की बीमारियां हो रही हैं साथ ही अन्य कई घातक बीमारी होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ प्रशांत सिनकर उन्होंने यह भी बताया कि पेड़ों की संख्या कम होने की वजह से बारिश का पानी ज़मीन में जाने के बजाय सड़कों पर जमा हो रहा है, और हल्की बारिश में भी बाढ़ आ रही है।

इस पृष्ठभूमि में, डॉ. सिनकर ने ज़ोर देकर मांग की है कि सरकार ‘ट्री-सेंट्रिक डिज़ाइन’ को ज़रूरी बनाए, जानबूझकर पेड़ काटने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करें साथ ही पेड़ दोबारा लगाने के प्रक्रिया का एक स्वतंत्र तीसरी पार्टी ऑडिट कराए।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “सड़कें और इमारतें फिर से बनाई जा सकती हैं; लेकिन 50 साल पुराना पेड़ एक दिन में नहीं बनाया जा सकता। आज लिए गए फैसले कल की पीढ़ियों का भविष्य तय करेंगे,” और इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने की अपील की।

डॉ. प्रशांत सिनकर ने यह भी कहा कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए ठोस नीति फैसले लेने का यह सही समय है और सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करने की ज़रूरत है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा