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सीमेंट- कंक्रीट की गर्मी व लू से ठाणे पूर्व में कौए मृत मिले- डॉ प्रशांत

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सीमेंट- कंक्रीट की गर्मी व लू से ठाणे पूर्व में कौए मृत मिले- डॉ प्रशांत


सीमेंट- कंक्रीट की गर्मी व लू से ठाणे पूर्व में कौए मृत मिले- डॉ प्रशांत


मुंबई,28 अप्रैल ( हि.स) । मुंबई एवं उपनगरीय शहर में बढ़ती गर्मी को देखते हुए जहाँ बेजुबान पर्यावरणविद की मदद के लिए हाथ बढ़ाने की अपील कर रहे हैं, वहीं मंगलवार को ठाणे ईस्ट में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जब तीन कौवे मरे हुए पाए गए। बढ़ते सीमेंट-कंक्रीट के जंगल से पैदा हुई अर्बन हीट का असर अब सीधे तौर पर बेजुबान पक्षि

बताया जाता है कि कुदरत में इंसानी दखल बड़े पैमाने पर बढ़ रहा है, और इसका असर अब सिर्फ़ इंसानों को ही नहीं, बल्कि जानवरों और पक्षियों को भी झेलना पड़ रहा है। ठाणे शहर, जो कभी हरियाली और पानी के सोर्स से भरपूर था, अब तेज़ी से कंक्रीट के जाल में फंसता जा रहा है। नतीजतन, शहर का तापमान जलती भट्टी की भांति काफ़ी बढ़ रहा है और 'अर्बन हीट आइलैंड' का असर दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।

मंगलवार को ठाणे ईस्ट के जीजामाता मार्ग, बाराबंगला इलाके में तीन कौवे मरे हुए पाए गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पक्षियों की मौत बहुत ज़्यादा गर्मी और पानी की कमी की वजह से हुए हीट स्ट्रोक से हुई होगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शहर में तेज़ी से पेड़ों की कटाई, बढ़ते कंस्ट्रक्शन और घटते कुदरती पानी के सोर्स पक्षियों के कुदरती रहने की जगह को खत्म कर रहे हैं। इससे छाया और पानी की तलाश में भटकने वाले पक्षियों के लिए ज़िंदा रहना मुश्किल हो गया है।

बढ़ती गर्मी से पक्षियों को बचाने के लिए लोगों को पहल करनी होगी। अपने घरों की छत, खिड़की या बालकनी पर पक्षियों के लिए पानी के छोटे-छोटे प्याले रखें। हो सके तो उनमें थोड़ा गुड़ या ग्लूकोज़ डालने से पक्षियों को एनर्जी मिलेगी। साथ ही, अपने इलाके में देसी पेड़ लगाने चाहिए और उनकी देखभाल करनी चाहिए ताकि भविष्य में पक्षियों को कुदरती छाया मिल सके।

मुंबई के पर्यावरणविद डॉ प्रशांत ने कहा कि - प्रकृति के इकोसिस्टम में कौओं जैसे पक्षियों का रोल बहुत अहम है; वे कुदरत के सच्चे 'सफ़ाई के दूत' हैं। बदकिस्मती से, अगर ये पक्षी बढ़ते तापमान का शिकार होते हैं, तो यह तय है कि भविष्य में इसका इंसानों की सेहत पर बुरा असर पड़ेगा। यह सिर्फ़ पानी के प्याले रखने का समय नहीं है, बल्कि शहर के बढ़ते तापमान को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने का भी समय है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा