लापरवाह ठेकेदारों पर अंकुश, ‘रेड कार्ड’ मिला तो होंगे टेंडर से बाहर
मुंबई, 11 अगस्त (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार ने पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में देरी करने वाले, खराब कंस्ट्रक्शन और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर अंकुश लगाने के लिए अहम निर्णय लिया है। अब उनके काम का मूल्यांकन परफॉर्मेंस टेस्ट के जरिए किया जाएगा। इस टेस्ट में 60 फीसदी से कम अंक हासिल करने वाले ठेकेदारों को रेड कार्ड कटेगरी में रखा जाएगा। उन्हें अपात्र ठहरा कर टेंडर से बाहर कर दिया जाएगा। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग शासनादेश जारी कर दिया है।
यह आदेश 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक की लागत वाली परियोजनाओं के टेंडरों के लिए लागू होगा। यह नियम विभिन्न सरकारी विभागों और निकाय संस्थाओं की बड़ी परियोजनाओं पर लागू होगा। सरकारी ठेकेदारों के लिए कार्य मुल्यांकन अनिवार्य कर दिया गया है। ठेकेदारों को 100 अंकों के आधार पर ‘ग्रीन’, ‘येलो’ और ‘रेड’ कैटेगरी में बांटा जाएगा। समय पर काम पूरा करने के लिए 30 अंक, गुणवत्ता के लिए 60 अंक और रखरखाव के लिए 10 अंक होंगे। परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट के बिना एक्सपीरियंस एक्सेप्ट नहीं किया जाएगा।
नियमानुसार 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक लागतवाली परियोजनाओं के लिए कार्य मुल्यांकन सिस्टम लागू होगा। ठेकेदार के परफॉर्मेंस का ओवरऑल इवैल्यूएशन 100 अंकों के आधार पर होगा। काम की गुणवत्ता के लिए 60 मार्क, परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए 30 मार्क और रखरखाव व चल रहे काम के ओवरऑल परफॉर्मेंस के लिए 10 मार्क ऱखे गए हैं। 80 से ज़्यादा मार्क प्राप्त करने वाले ठेकदार को ‘ग्रीन’ कार्ड, 60 से 80 मार्क प्राप्त करने वाले को ‘येलो’ कार्ड और ‘रेड’ कार्ड यानी 60 से कम अंक मिलने वाले ठेकेदार को टेंडर के लिए अपात्र ठहरा दिया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

