मतदाता सूची का सही मानचित्रण हो- चोक्कालिंगम मुख्य चुनाव अधिकारी
मुंबई, 10 अप्रैल (हि. स.) ।वोटिंग प्रोसेस में ट्रांसपेरेंसी और एक्यूरेसी लाने के लिए, वोटर लिस्ट की 100 परसेंट मैपिंग आज की ज़रूरत है। मैपिंग के मामले में महाराष्ट्र अभी दूसरे राज्यों से पीछे है, खासकर ठाणे और पालघर जैसे शहरी जिलों को और तेज़ी से काम करने की ज़रूरत है। प्रशासनिक प्रणाली को अब 90 से 94 % के 'मैजिक फिगर' को पार करने के लिए डेडिकेशन के साथ काम करना चाहिए, राज्य के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर एस. चोक्कालिंगम ने कह
उन्होंने कहा कि वोटर रजिस्ट्रेशन ऑफिसर और असिस्टेंट पोलिंग ऑफिसर को सिर्फ ऑफिस का काम करने के बजाय फील्ड में आने वाली चुनौतियों को समझना चाहिए। वोटर लिस्ट में शामिल वोटरों की 2002 की लिस्ट या उनके असली घर से मैपिंग करना इस कैंपेन की रीढ़ है। जो वोटर अभी मौजूद नहीं हैं, उनके घरों के बाहर नोटिस चिपकाए जाएं और सबूत के तौर पर उनके फोटो रखे जाएं। बीएलओ को घर-घर जाकर जियो-टैगिंग के साथ फोटो लेने की ज़रूरत है, ताकि काम में ट्रांसपेरेंसी बनी रहे। उन्होंने कैंपेन का दायरा बढ़ाने के लिए लोकल एनजीओएस और हाउसिंग सोसायटी के पदाधिकारियों की मदद लेने के भी निर्देश दिए।चुनाव प्रक्रिया में कमियों की ओर इशारा करते हुए, चोक्कालिंगम ने डुप्लीकेट नामों और धुंधली तस्वीरों का मुद्दा ज़ोरदार तरीके से उठाया। यह एक गंभीर मामला है कि एक ही व्यक्ति का नाम दो जगहों पर है, और अधिकारियों को ऐसे नामों को हटाने की प्रक्रिया खुद ही लागू करनी चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि चुनाव आयोग अपनी शक्तियों का इस्तेमाल सिर्फ़ योग्य भारतीय नागरिकों को रजिस्टर करने के लिए कर रहा है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिन वोटरों के रेफरेंस नहीं मिल रहे हैं, उनकी जानकारी उनके गांव या पुरानी वोटर लिस्ट में नामों के बारे में पूछकर अपडेट की जानी चाहिए।ठाणे के जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल ने इस मौके पर जिले के 18 चुनाव क्षेत्रों में चलाए गए जन जागरूकता कैंपेन की रिपोर्ट पेश की और सोशल मीडिया समेत अलग-अलग माध्यमों से जनता तक पहुंचने और तय समय में टारगेट पूरा करने का भरोसा दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

